522 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. देशमुखः वह, जिससे उम्मीदवार की पात्रता सीधे और निश्चित तौर पर प्रभावित हो सकती है।
मेरे पास अपने सुझाव का एक विकल्प भी है और मुझे उम्मीद है माननीय मंत्री जी उसे स्वीकार कर लेंगे। अगर हम वहाँ से फ्जो महत्वपूर्ण नहीं हैय् शब्दों को हटा दें, तो हमारा लक्ष्य पूरा हो जाएगा। अर्थात् हम केवल यह कहेंगे कि चुनाव अधिकारी किसी नामांकन-पत्र के लिए केवल तकनीकी कमी के कारण इंकार नहीं करेगा। हम इसी में फ्जो महत्वपूर्ण कोटि का नहीं हैय् शामिल करके ज्यादा अस्पष्ट बना रहे हैं, जिससे उसकी व्याख्या भी अलग-अलग ढंग से की जा सकती है। अतः मेरा सुझाव है कि या तो फ्और अत्यावश्यकय् शब्दों को शामिल कर लें या फ्जो महत्वपूर्ण कोटि का नहीं हैय् शब्दों को हटा दें। एक तकनीकी कमी को स्वाभाविक माना जा सकता है।
अब मैं अपने दूसरे संशोधन पर आता हूँ। मैं प्रस्तुत करना चाहता हूँः
खंड 34 के उप-खंड (5) में फ्या दंगों अथवा खुली हिंसा द्वारा बाधितय् शब्दों को हटा दें।
हम इसकी कार्रवाइयों को बाधित होने का कारण केवल दंगों अथवा खुली हिंसा तक सीमिम क्यों मान लें? महोदय, मुझे लगता है कि यह बहुत ही तड़पाने वाला है कि हम केवल दो कारणों को शामिल करें। ऐसे अनेक प्रकार के कारण हो सकते हैं, जिससे कार्रवाई बाधित हो सकती है। इसीलिए मैं उन शब्दों को हटाने का सुझाव दे रहा हूँ। वस्तुतः मेरे विचार में इससे दंगों और खुली हिंसा को न्यौता भी मिल सकता है, यदि कुछ उम्मीदवार वैसा चाहने लगें।
श्री सिधवाः चक्रवात के बारे में क्या सवाल है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वह फ्नियंत्रण के बाहर के कारणोंय् के अंतर्गत आ जाएगा?
डॉ. देशमुखः अगर आप फ्या दंगों अथवा खुली हिंसा द्वारा बाधितय् शब्दों को हटा दें, तो मुझे नहीं लगता, इससे कोई हानि होगी। मुझे उम्मीद है कि मेरे दोनों संशोधन स्वीकार्य हो जाएंगे।
माननीय उपाध्यक्षः संशोधन प्रस्तुत हैः
खंड 34 के उप-खंड (4) में फ्महत्वपूर्णय् शब्द के बाद फ्और अत्यावश्यकय् शब्दों को शामिल किया जाए।
खंड 34 के उप-खंड (5) में फ्या दंगों अथवा खुली हिंसा द्वारा बाधितय् शब्दों को हटा दिया जाए।