528 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ऽपंडित ठाकुर दास भार्गवः हमारे पास केवल सूची 1 से 6 है।
माननीय अध्यक्षः सूची 1 से 7 को समेकित किया जा चुका है। पूरक सूची सं. 1 में फ्सूची सं. 7 शामिल करेंय् टिप्पणी है। यह पृष्ठ 18 पर सं. 112 है।
श्री आइयून्नीः मेरा निवेदन है कि मतदान अभिकर्ता को बहुत थोड़ा ही काम करना होता है। उसे प्रातःकाल आना होता है और शाम को छः या सात बजे तक ठहरना पड़ता है और कार्यवाहियों पर निगरानी रखनी पड़ती है। यदि मिथ्या प्रतिरूपण, आदि का कोई मामला होता है, तो उसे यह जांच करनी होती है कि क्या आने वाले व्यक्ति वस्तुतः मत देने के हकदार व्यक्ति हैं। वही उसका कार्य है। उसे उन सभी शर्तों को पूरा करने के लिए नहीं कहा जा सकता, जो ऐसे किसी अभ्यर्थी से अपेक्षित है जो यदि सफल होता है, तो यथास्थिति विधानसभा या संसद में जाएगा। अतः मेरा निवेदन है कि इतना ही पर्याप्त है कि क्या वह मतदाता है। यह मामले की अपेक्षा को पूरा करता है। अतः, मेरा निवेदन है कि माननीय विधि मंत्री द्वारा मेरा संशोधन स्वीकार किया जाए।
डॉ. अम्बेडकरः मैं नहीं जानता। इन जैसे विषयों में मेरी ज्यादा रुचि नहीं है। किन्तु बताई गई कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए, कि मतदान अभिकर्ताओं की भारी संख्या को कम किया जाए और यदि हम उन पर कतिपय निरर्हताएं थोपेंगे तो उनकी उपलब्धता संख्या बहुत कम हो जाएगी और तब निर्वाचनों का संचालन में काफी कठिनाई पैदा हो सकती है। अतः मैं अपने माननीय मित्र पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्याय के संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।
माननीय अध्यक्षः क्या यह उस पूरे खंड को निकाल देने के लिए है?
डॉ. अम्बेडकरः नहीं, मुद्दा यह है। मुझे बताया गया है कि हमारे मित्र जो निर्वाचन में खड़े होना चाहते हैं, ऐसे विद्यालय छात्रों में से अभिकर्ता लेना चाहते हैं, जिनकी आयु विहित सीमा से कम हो और यह हो सकता है कि वे मतदाता भी न हों। मैंने व्यक्तिगत रूप से उनसे कहा है कि वे पहले ही विद्यालयी नवयुवक छात्रों को राजनैतिक क्षेत्र में लाकर घोर अनिष्ठ कर चुके हैं और बेहतर यह होगा कि उसी बात को न दोहराएं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह सुविधा होनी ही चाहिए। अतः मैं वह अनुज्ञात करने के लिए तैयार हूँ।
माननीय अध्यक्षः यह वही हुआ जैसा मैं कह रहा था। क्या मैं संपूर्ण खंड 45 को निकालकर और अस्वीकार करके भूल करूंगा। मैं सर्वप्रथम खंड को रखता हूँ। प्रश्न हैः
फ्खंड 45, विधेयक का भाग होगा।य्
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 21 मई, 1951, पृष्ठ 9179