530 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
( i ) खंड 44 में, फ्उसके मतदान अभिकर्ता के रूप में कार्य करने के लिए एक
अभिकर्ता और दो एवजी अभिकर्ता और इससे अधिक नहींय् शब्दों के स्थान पर
फ्ऐसी संख्या में अभिकर्ता और एवजी अभिकर्ता, जो ऐसे अभ्यर्थी के मतदान
अभिकर्ताओं के रूप में कार्य करने के लिए विहित किए जाएंय् शब्द रखें।
( ii ) खंड 44 में, फ्और ऐसा अन्य अधिकारी, जो विहित किया जाएय् शब्दों को
हटा दें।
श्री शिवचरण लालः श्रीमन्, मैं दूसरे भाग को सुन नहीं सका।
माननीय अध्यक्षः मैं इसे पुनः पढ़ता हूँ। यथाउपरोक्त लाया गया डॉ. अम्बडेकर का संशोधन।
अत, मैं विधि मंत्री से अनुरोध करता हूँ कि खंड के उन्हीं शब्दों को रहने दिया जाए, जो हैं और हटाए नहीं गए हैं।
(पंडित ठाकुर दास भार्गव पीठासीन हुए)
क्या मैं विधि मंत्री का ध्यान आकृष्ट कर सकता हूँ कि फ्ऐसा अन्य अधिकारी, जो विहित किया जाएय् शब्दों को बने रहने की अनुमति दी जाए जिससे कि रिटर्निंग अधिकारी सामान्य ढंग से मतदान अभिकर्ताओं की नियुक्ति के लिए आवदेन लेने हेतु पीठासीन अधिकारी को विहित कर सके।
श्री जे.आर. कपूर (उत्तर प्रदेश)ः क्या मैं जान सकता हूं कि दूसरा संशोधन क्या है?
डॉ. अम्बेडकरः मेरे मित्र ध्यान दें कि खंड 44 के अंतिम शब्द इस प्रकार हैंः
फ्नियुक्ति की सूचना रिटर्निंग अधिकारी और ऐसे अन्य किसी अधिकारी को जो विहित किया जाए, को विहित रीति से दी जाए।य्
नियमों में यह विहित हो सकेगा कि मतदान अभिकर्ता की नियुक्ति की सूचना रिटर्निंग अधिकारी और ऐसे अन्य किसी अधिकारी जो विहित किया जाए, को दी जा सकेगी। मैं उस वाक्य को अपने संशोधन द्वारा हटाना चाहता हूँµ
फ्ऐसे अन्य अधिकारी जो विहित किया जाएय् का लोप किया जाए जिससे कि इसका परिणाम यह होगा कि सूचना केवल रिटर्निंग अधिकारी को दी जाएगी।
माननीय अध्यक्षः यह सरकार का विवेकाधिकार है कि वह किसी अन्य अधिकारी की भी नियुक्ति करे। यह संशोधन उस विवेकाधिकार को छीन रहा है। व्यवहार में,