34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 546

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प्रायः यह पीठासीन अधिकारी, या उस समय के मतदान अधिकारी को यह सूचना दी जाती है। अतः मैं विधि मंत्री इस पर विचार करने का अनुरोध करता हूं कि क्या ये शब्द समर्थकारी के उलट हैं।

डॉ. अम्बेडकरः आप इन चीजों का अंदरूनी इतिहास जानते हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से धारा के शब्दों से संतुष्ट हूँ_ मैं अपना संशोधन वापस लेने के लिए तैयार हूँ और उन्हीं शब्दों को रहने देता हूँ, जो हैं।

श्री जे.आर. कपूरः मैं सुझाव देता हूं कि यह फ्रिटर्निंग अधिकारी या ऐसा कोई अन्य अधिकारीय् हो सकता है।

डॉ. अम्बेडकरः रिटर्निंग अधिकारी को सारी बातें जाननी चाहिए।

माननीय अध्यक्षः क्या माननीय मंत्री जी को उस चुनाव पर कुछ कहना है?

डॉ. अम्बेडकरः मैं उसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हूँ।

श्री जे.आर. कपूरः यदि फ्याय् शब्द नहीं रखा जाता है तो फ्ऐसा काई अन्य अधिकारीय् शब्दों को बनाए रखने का पूरा उद्देश्य समाप्त हो जाता है। हमारा आशय यह है कि अभ्यर्थी को अपने मतदान अभिकर्ताओं के नाम पीठासीन अधिकारी को प्रस्तुत करने की सुविधा होनी चाहिए। मैं यह चाहूंगा कि दोनों शब्दों के बने रहने के बजाए इन शब्दों को ही हटा दिया जाए, यदि मेरा संशोधन स्वीकार नहीं किया जाता है।

माननीय अध्यक्षः निश्चित रूप से इसका यह अर्थ नहीं है कि सूचना दो अधिकारियों को दी जाए।

माननीय अध्यक्षः अवधि का प्रश्न अभी अनिश्चित है, अतः तब तक इसका विनिश्चय नहीं किया जा सकता।

श्री जे.आर. कपूरः संपूर्ण खंड 44 को स्थगित रखा जाए।

डॉ. अम्बेडकरः मेरा सुझाव है कि मेरे प्रथम संशोधन पर विचार किया जाए और दूसरे संशोधन को स्थगित किया जाए।

पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्यायः दोनों ही संशोधनों को क्यों न स्थगित किया जाए, क्योंकि हमने परिभाषित नहीं किया है कि दो अभिकर्ता, एक अभिकर्ता और एक एवजी अभिकर्ता की नियुक्ति प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए की जाए।

डॉ. अम्बेडकरः प्रथम संशोधन का दूसरे संशोधन से काई अभिन्न संबध नही है।