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माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः
फ्यथासंशोधित खंड 49, विधेयक का भाग बन गया।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
यथासंशोधित खंड 49, विधेयक में जोड़ा गया।
खंड 50, विधेयक में जोड़ा गया।
नया खंड-50क
श्री एस.एन. दास (बिहार)ः निर्वाचन-पत्रों को निःशुल्क डाक से भेजने के उम्मीदवार के अधिकार से संबंधित नये खंड 50क का सुझाव देते हुए मेरे नाम से एक संशोधन है।
डॉ. अम्बेडकरः क्या मैं इस प्रक्रम पर समय बचाने के लिए हस्तक्षेप कर सकता हूँ। श्रीमन्, आपको याद होगा कि पिछली बार इस विषय पर चर्चा हुई थी कि क्या उम्मीदवार को उसके निर्वाचन-पत्रों का निःशुल्क डाक से भेजने की अनुज्ञा देने का उपबंध किया जाना चाहिए और मैंने कहा था कि मैं मामला सरकार को निर्दिष्ट करूंगा और यह देखूंगा कि क्या ऐसी बातें नहीं कि जा सकतीं। मैंने सोचा कि सदन ने उस समय मेरे आश्वासन को उस आशय के किसी विनिर्दिष्ट संशोधन के बिना स्वीकार किया था।
श्री सिंधवाः इसे स्थगित किया जाए।
डॉ. अम्बेडकरः नहीं, यह आवश्यक नहीं है।
माननीय अध्यक्षः क्या मैं समझ सकता हूँ कि माननीय प्रस्तावक इस आश्वासन को ध्यान में रखते हुए कि माननीय मंत्री जी मामला सरकार को निर्दिष्ट करेंगे, अपना संशोधन नहीं लाना चाहते?
श्री एस.एन. दासः विधि मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन को ध्यान में रखते हुए, मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या मुझे अपना संशोधन लाने की अनुज्ञा दी जाएगी।
माननीय अध्यक्षः अनुज्ञा दिए जाने का कोई प्रश्न ही नहीं है। उन्हें प्रस्ताव लाने की पूर्ण स्वतंत्रता है। मैं केवल उन्हें यह सुझाव देता हूं कि क्या यह प्रस्ताव लाना वांछनीय है जब कि माननीय मंत्री ने आश्वासन दिया है।
श्री एस.एन. दासः इसे स्थगित किया जाए।
माननीय अध्यक्षः स्थगित किए जाने का कोई प्रश्न नहीं है। इतने थोड़े समय में सरकार से उत्तर नहीं आएगा। वे चाहें तो प्रस्ताव लाएं या न लाएं।