546 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अधिकारी या मतदान अधिकारी बनाया जाए। यह ऐसा करने का एक तरीका है। दूसरा तरीका यह है कि हम निरुद्ध व्यक्तियों को सामान्य मतदान केंद्र पर, निस्संदेह पुलिस के साथ और संभवतः हथकड़ी लगाकर ले जाने की अनुज्ञा दें और दो या तीन मील चलकर कारागार जाने की भी अनुमति प्रदान करें। और तीसरा तरीका डाक मतदान-पत्र द्वारा मत डालने का तरीका होगा। स्पष्टतः मेरे विवेकानुसार प्रत्येक कारागार में एक मतदान केंद्र बनाना बहुत कठिन होगा, क्योंकि कुछ कारागारों में काफी संख्या में निरुद्ध व्यक्ति हो सकते हैं, कुछ कारागारों में एक या दो हो सकते हैं और कुछ में कोई भी नहीं हो सकता।
संसदीय कार्य राज्यमंत्री (श्री सत्यानारायण) ः यह संभव होगा।
डॉ. अम्बेडकरः मैं सोचता हँ कि गृहमंत्री सदन को यह बताने की बेहतर स्थिति में होंगे कि यह कैसे किया जा सकेगा।
श्री सत्यनारायण सिन्हाः मैंने गृहमंत्री जी से परामर्श किया है।
डॉ. अम्बेडकरः दूसरे तरीके के संबंध में, मैं यह नहीं सोचता कि कोई निद्ध व्यक्ति अनुकल्पतः पुलिस संरक्षण हाथ में लगी हथकड़ी और दो या तीन मील की दूरी की परेड करते हुए जाने के लिए सहमत होगा।
माननीय अध्यक्षः दो या तीन मील ही क्यों? यह पचास मील या अधिक हो सकती है, क्योंकि निर्वाचन-क्षेत्र कारागार से काफी दूर हो सकता है।
डॉ. अम्बेडकरः एक अन्य कठिनाई है। अतः दूसरा तरीका जिस पर विचार करना शेष है, वह डाक मतपत्र ही है। मैं इंगित करना चाइता हूं कि डाक मतदान प्रणाली में क्या होने की संभावना है। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि तब मतदान-पत्र को मतदान की तारीख से काफी पहले वितरित करना होगा। उस प्रयोजन के लिए निर्वाचन आयुक्त को यह पता लगाने के लिए कि कितने निरुद्ध व्यक्ति अभिरक्षा में हैं, विभिन्न कारगारों के अधीक्षकों को परिपत्र भेजना होगा और इस प्रकार प्राप्त जानकारी के अनुसार वह उस तारीख को, किए गए आकलन के अनुसार, यह महत्वपूर्ण है, मतपत्र वितरित करेगा। परिपत्र निश्चित ही कम से कम कुछ समय पहले कारागार अधीक्षकों को भेजा जाना चाहिए। यह चाहे वास्तविक मतदान होने के एक मास या तीन सप्ताह पहले हो और तब मतदान-पत्रों को कारागार अधीक्षकों को उनकी अभिरक्षा के अधीन विभिन्न निरुद्ध व्यक्तियों को वितरित करने के लिए भेजा जाना चाहिए। सदन को इस प्रकर पर विचार करना हैः कि ऐसे नजरबंद व्यक्तियों के संबंध में क्या किया जाए, जिन्हें वह तारीख जिसको यह जांच की जाती है और वह तारीख जिसको मतदान होता है, के बीच कारागार अभिरक्षा में लाया जाता है। सुस्पष्टतः, उनकी बाबत कोई मतदान-पत्र नहीं हो सकता, क्योंकि मतदान-पत्र उस विशिष्ट दिन के अनुसार प्रस्तुत आकलन के आधार पर