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भी जेलर को भेजा जाएगा। यह हो सकता है कि उस तारीख के बीच जाने के पश्चात् पचास और निरुद्ध व्यक्ति कारागार में भेज दिए जाएं। वे वहां हैं, इसलिए डाक मतपत्र की इस प्रणाली को अंगीकार करके आप इस सामान्य वांछा को प्रभावी नहीं बना रहे हैं कि निरोधाधीन प्रत्येक व्यक्ति को मताधिकार प्राप्त होना चाहिए (व्यवधान)। उनमें से अधिकांश मतदान कर पाएंगे किंतु कुछ नहीं भी कर पाएंगे। क्या आप उत्सुक हैं कि ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को जो निरोधाधीन हैं, मत देने का अवसर मिले......?
श्री जे.आर. कपूरः जहां तक भौतिक रूप से संभव हो।
डॉ. अम्बेडकरः ...........यह प्रयोजन पूरा होने नहीं जा रहा है। ऐसे कुछ लोग हैं जिनका लोप करना ही होगा। और जहां तक मैं कल्पना कर सकता हूँ, यह पूर्णतः संभव है कि ऐसे लोगों की संख्या जिन्हें मतदान होने के ठीक समीप या निवारक निरोध के पश्चात् भेजा जाएगा, पहले की अपेक्षा काफी अधिक भी हो सकती है। मैं किसी बात की पूर्व कल्पना नहीं करना चाहता लेकिन मेरा यह भय है कि ऐसी छोटी बातें हो सकती हैं। अतः, आप ऐसा उपबंध नहीं कर पा रहे हैं जिसे मैं अकाट्य या प्रवंचना मुक्त कह सकूं (व्यवधान)। वास्तव में, यह विषय खंड के प्रतिनिर्देश के बिना उठाया गया है। यह विषय खंड 61 के अधीन ही उठ सकता है, क्योंकि इसके उप-खंड (5) में विनिर्दिष्ट उपबंध है। यह खंड 59 के अधीन नहीं आ सकता। खंड 61 के उप-खंड (5) में उल्लेख है कि फ्ऐसा कोई व्यक्ति किसी निर्वाचन में मत नहीं दे सकेगा यदि वह किसी कारागार में परिरुद्ध है, चाहे कारावास के दंडादेश या परिवहन या अन्यथा के अधीन या पुलिस की विधिपूर्ण अभिरक्षा में है या निवारक निरोध के अधीन है............।य् अतः, यदि कोई संशोधन किया जाना है, तो यह खंड 61 के उप-खंड (5) के अधीन किया जाना चाहिए। मैं सोचता हूं कि यह विषय खंड 50 की व्याप्ति के बिल्कुल बाहर है।
श्री सिधवाः यदि हम इसे पारित करते हैं तो यह खंड 61 के अधीन जाएगा।
डॉ. अम्बेडकरः हम इसे अभी कैसे पारित कर सकते हैं? मैंने आपको बताया है कि क्या कठिनाई पैदा होने की संभावना है। यदि इसके बावजूद आप ऐसा करना चाहते हैं, तो वह अलग बात है। यह किसी व्यक्ति के विवेक का विषय नहीं है। मैं नहीं जानता कि सरकार क्या व्यवस्था कर सकती है।
श्री भारती (मद्रास)ः एक कठिनाई यह भी है कि उनमें से कुछ निरक्षर हो सकते हैं।
एक माननीय सदस्यः वे साक्षर भी हैं।
डॉ. अम्बेडकरः मैंने केवल प्रशासनिक कठिनाइयों का उल्लेख किया है। यदि उदाहरण के लिए यह मान लिया जाए कि किसी विशिष्ट कारागार में निरुद्ध व्यक्तियों