34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 568

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है, इसीलिए हमें कुछ अन्य व्यवस्था करनी होगी। मिथ्या प्रतिरूपण मतदान से समबद्ध एक अनिवार्य पहलू है। विशेषकर जब इतनी भारी संख्या अंतर्गस्त हो। इसीलिए हमने

खंड 60 में एक तरीका सुझाया। इसमें कोई गलत बात नहीं है, जब अमीर और गरीब सभी को अपना अंगूठा निशान लगाना होगा। इस बारे में कोई प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं है। हमारा देश गरीब होने के कारण हम सभी को रजिस्ट्रीकरण या पहचान कार्ड नहीं दे सकते और आप पहचान के प्रयोजनों के लिए किसी विशिष्ट स्थान पर प्रत्येक मतदाता से हस्ताक्षर करने की प्रत्याशा नहीं कर सकते क्योंकि बहुत सारे लोग निरक्षर हैं। इसलिए हम पहले दो या तीन निर्वाचनों के दौरान अस्थायी रूप से इस युक्ति पर आशान्वित हैं। इस मामले में भावनाओं को महत्व देने का कोई फायदा नहीं है। यह केवल प्रतिरूपण के विरुद्ध एक संपूर्ण उपबंध है, जो सभी निर्वाचनों का आम लक्षण है जहां ऐसे भारी संख्या में लोग शामिल होते हैं। बेईमानी के विरुद्ध उपबंध किया जाना चाहिए और यदि उस प्रयोजन के लिए हमें कुछ असुविधा भी हो रही हो, तो भी मैं यह नहीं समझता कि वहां कोई गंभीर दोष है। ऐसा तर्क जो इस खंड को हटाने के संशोधन के समर्थन में उद्धृत किया गया है, स्थिति के सभी पहलुओं पर पूर्णतः विचार किए बिना किया गया है। अतः मैं इस खंड जैसा यह है, का समर्थन करता हूं।

माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः

फ्कि खंड 60 विधेयक का भाग हो गया।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

खंड 60, विधेयक में जोड़ा गया।

खंड 61 (मताधिकार)

संशोधन किया गयाः

खंड 61 के उप-खंड (5) में, फ्या तत्समय किसी विधि के अधीन निवारक निरोध के अधीन हैं।य्

µ¹श्री जे.आर. कपूरह्

डॉ. अम्बेडकरः सदन को उसको भी विचार में लेना चाहिए जो मैंने कहा कि यद्यपि डाक मतपत्र अंगीकार करने का आसान तरीका प्रतीत होता है जब तक निर्वाचनों को अनिश्चित काल के लिए मुल्तवी नहीं किया जाता। पर हमें प्रशासनिक कठिनाइयों के लिए कुड उपबंध करना होगा और हम प्रत्येक व्यक्ति को मतदान-पत्र देने की स्थिति में नहीं हैं। यह बात भी ध्यान में रखनी होगी। जो मैंने सोचा था यह था किµक्योंकि हम तुरंत किसी ऐसे संशोधन का सुझाव देने की स्थिति में नहीं हैं, जो निवारक निरोध के अधीन व्यक्तियों को मताधिकार प्रदान करता हो, और प्रशासनिक कठिनाइयों को