34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 570

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बहु-निर्वाचन-क्षेत्र में अधिक होगी, तो मतदाताओं को केवल ऐसी रीति जैसा वे चाहते हैं, से मत देने का अधिकार होगा_ वस्तुतः सामान्य सीट पर निर्वाचन लड़ने के लिए हरिजनों और गैर-हरिजनों का स्तर एक समान होना चाहिए। यदि मतदाता यह सोचते हैं कि हरिजन उम्मीदवार एक अच्छा उम्मीदवार है और योग्य है तो वह गैर-हरिजनों के भी मत पाएग और उस निर्वाचन-क्षेत्र से निर्वाचित हो जाएगा। किन्तु यदि वह अधिक मत नहीं पाता है तो वह दूसरी सीट, जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, पाने का हकदार होगा।

डॉ. अम्बेडकरः मैं यह संशोधन स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हूँ।

श्री सोनावनेः मैं अपना संशोधन वापस लेने की इजाजत चाहता हूँ।

संशोधन इजाजत से वापस लिया गया।

श्री जे.आर. कपूरः मैं प्रस्ताव लाना चाहता हूँः

खंड 62 के उप-खंड (2) के स्थान पर निम्नलिखित रखेंः

फ्(2) यदि निर्वाचक उप-धारा (1) के उपबंधों के उल्लंघन में किसी एक उम्मीदवार को एक से अधिक मत देता है, तो दोनों मत रद्द हो जाएंगे।

डॉ. अम्बेडकरः इस विषय पर चयन समिति में काफी विस्तार से विचार किया गया था।

श्री जे.आर. कपूरः चयन समिति द्वारा कई बातों पर बहुत गंभीरता से विचार किया गया था। किन्तु आप उस समय, ऐसे गंभीर विचार की व्याख्या कर पाएंगे, जब रिपोर्ट की यहां संवीक्षा की जाएगी।

अतः मैं इस पर बहस करना चाहता हूँ।

माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य कल ऐसा करेंगे

तब सदन 22 मई, 1951, मंगलवार को साढ़े आठ बजे तक स्थगित किया गया।

ऽमाननीय अध्यक्षः संशोधन पेश किए गएः

( i ) खंड 62 के उप-खंड (1) में, फ्किंतु कोई निर्वाचक किसी एक उम्मीदवार को एक से अधिक मत नहीं देगा।य् शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित रखेंः

ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 23 मई, 1951, पृष्ठ 9248-49