558 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के प्रवर्गों और उन पद्धतियों को जिसके द्वारा इसे भेजा जाना है, पृथक करने की खातिर यह संशोधन पेश किया गया प्रतीत होता है। संशोधन किसी भी तरह से सार-भाव को परिवर्तित नहीं करता। यह केवल अभिव्यक्ति का बेहतर तरीका है।
डॉ. अम्बेडकरः हाँ, यह एक ही बात है। मैं इसमें और कुछ नहीं जोड़ना चाहता जो माननीय सदस्य ने कहा है।
श्री कॉमथः क्या हम इसमें फ्सम्यक् अभिस्वीकृति के साथय् को जोड़ेंगे?
माननीय उपाध्यक्षः हमें इसे जोड़ने की आवश्यकता नहीं है। कुल मिलाकर आवश्यक यह है कि इसका लाभ दूसरे पक्ष को दिया जाए।
प्रश्न यह हैः
कि खंड 80 के उप-खंड (2) के स्थान पर निम्नलिखित उप-खंड रखेंः
फ्(2) किसी निर्वाचन को निर्वाचन आयोग के समक्ष दिया गया समझा जाएगाµ
(क) जब यह आयोग के सचिव या ऐसे अन्य अधिकारी को सौंपी जाती है, जिसे इस बाबत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त किया जाएµ
( i ) अर्जी देने वाले व्यक्ति द्वारा_ या
( ii ) अर्जी देने वाले व्यक्ति द्वारा इस बाबत लिखिए रूप में प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा_ या
(ख) जब वह पंजीकृत डाक द्वारा भेजी जाती है और आयोग के सचिव या उसके लिए नियुक्त अधिकारी को सौंपी जाती है।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
ऽमाननीय उपाध्याक्षः मैं नहीं सोचता कि इस मुद्दे पर मेहनत करने की आवश्यकता है। विधि मंत्री जी को इस संशोधन पर क्या कहना है?
डॉ. अम्बेडकरः मैं संशोधन स्वीकार करता हूँ।
खंड 85
ऽऽश्री सतीश चन्द्रः सदन संशोधनों पर अनौपचारिक चर्चा के लिए कल स्थगित कर दिया गया था। हमने 1 बजे उस अनौपचारिक बैठक से स्थगन ले लिया था और मैंने 1 बजे अपने संशोधन के लिए नोटिस दिया था। किन्तु यह आज की तारीख में स्वीकार किया गया है।
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 23 मई, 1951, पृष्ठ 9282
ऽऽवही, पृष्ठ 9284-85