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माननीय उपाध्यक्षः क्या अनौपचारिक कमेटी में विषय पर चर्चा की गई और सहमति हुई?
डॉ. अम्बेडकरः हाँ, इस पर सहमति हुई थी।
माननीय उपाध्यक्षः क्या इस पर सहमति हुई है कि वहां कोई अधिवक्ता नहीं होना चाहिए?
डॉ. अम्बेडकरः कोई भी व्यक्ति कोई अधिवक्ता नहीं चाहता। उप-खंड (2) का
खंड (ख) हटाने से भी मामला उठ सकता है। यह इस पर उत्पन्न्न नहीं हो सकता।
माननीय उपाध्यक्षः खंड जैसा है, उसे स्वीकार करके भी वह किसी अधिवक्ता से बच नहीं सकता।
श्री सतीश चन्द्रः मैं यह सुझाव देता हूं कि इस खंड को स्थगित किया जाए। सदस्यों को कल की अनौपचारिक चर्चा के पश्चात् संशोधनों पर नोटिस देने का कोई अवसर नहीं था। चर्चा के पश्चात् मेरे द्वारा नोटिस दी गई है, किन्तु उस पर कल विचार किया जाएगा। यदि आप मेरे उस संशोधन को जिसकी नोटिस मैंने दी है, लाने की अनुज्ञा दें, तो मैं ऐसा करूं।
माननीय उपाध्यक्षः नहीं, मैं उसमें से किसी विनिश्चय द्वारा आबद्ध नहीं हूँ, किन्तु कुछ भी हो माननीय सदस्य भी उस अनौपचारिक बैठक में थे जिसमें इस विषय के संदर्भ से व्यवस्था में सहमति हुई थी। वहां प्रतिकूल विनिश्चय किए गए थे। तो क्या मेरे द्वारा खंड को स्थगित करने की अनुज्ञा दिया जाना उचित है?
श्री सतीश चन्द्रः मैं ससम्मान यह निवेदन करता हूं कि सदन के 320 सदस्यों में से जो कल सदन में रखे गए संशोधनों पर अनौपचारिक चर्चा करने के विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए स्थगित किया गया था, इस विधेयक की प्रवर समिति की संख्या जितने सदस्य भी वहाँ उपस्थित नहीं थे।
माननीय उपाध्यक्षः इसके लिए किसे उत्तरदायी माना जाए? माननीय मंत्री को?
श्री सतीश चन्द्रः मैं माननीय मंत्री को उत्तरदायी नहीं ठहराता।
डॉ. अम्बेडकरः आप तो उपस्थित थे। इस पर ध्यान न दीजिए कि अन्य लोग उपस्थित थे या नहीं, आप तो उपस्थित थे।
श्री सतीश चन्द्रः मैंने संशोधन का विरोध किया था, किन्तु मुझे अपनी पूरी बात कहने का मौका नहीं दिया गया। इसलिए, मैं यह चाहता हूं कि.......