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श्री जे.आर. कपूरः मैं पूर्णतः उसके पक्ष में नहीं हूँ जो श्री सतीश चन्द्र कर रहे हैं, किन्तु अचानक मेरे मस्तिष्क में यह आया कि जो वह कह रहे हैं उसमें मूलभूत महत्व का कुछ मुद्दा है और वह यह है कि खंड 85 के उप-खंड (3) के भाग (ख) के संबंध में श्री मुनीश्वर दत्त का संशोधन यह अनुबंध करता है कि उप-खंड (2) के अधीन उसके द्वारा रखी गई दो सूचियों में से निर्वाचन आयोग द्वारा एक सदस्य के बजाए दो सदस्यों का चयन किया जाएगा। किन्तु इन दो सदस्यों का चयन केवल भाग (क) के अधीन सूची में से नहीं, बल्कि भाग (क) और (ख) के अधीन दोनों सूचियों में से किया जा सकता है।
डॉ. अम्बेडकरः इस दशा में उनका आक्षेप समाप्त हो जाता है।
श्री जे.आर. कपूरः इसीलिए वह आक्षेप समात्त हो जाता है।
श्री कॉमथः मैं यह उल्लेख करना चाहता हूँ कि विधि मंत्री द्वारा और संभवतः बाद में सदन द्वारा श्री उपाध्याय के संशोधन के स्वीकृति मेरे मित्र श्री सतीश चन्द्र द्वारा उठाए गए प्रश्न के कुछ मुद्दा देती है?
खंड 85 का उप-खंड (3) जैसा यह विद्यमान है, इस प्रकार हैः
फ्उप-धारा (1) के अधीन नियुक्त प्रत्येक अधिकरण निम्नलिखित से मिलकर बनेगाµ
(क) अध्यक्ष जो या तो ऐसा व्यक्ति होगा जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश
है या रहा है या उप-धारा (2) के खंड (क) के अधीन उसके द्वा रखी
गई सूची में से निर्वाचन आयोग द्वारा चयनित व्यक्ति होगा_ और
(ख) उप-धारा (2) के अधीन उसके द्वारा रखी गई सूचियों में से निर्वाचन आयोग
द्वारा चयनित एक अन्य सदस्य।य्
श्री उपाध्याय द्वारा संशोधन की स्वीकृति से यह परिणाम निकलेगा कि एक सदस्य के स्थान पर दो सदस्य जो वह प्रस्ताव करता है, इन सूचियों में से चयनित किए जाएंगे। अर्थात् संभावना इस बात की है कि उनमें से दोनों भाग (ख) में वर्णित सूची में से हो सकते हैं।
डॉ. अम्बेडकरः (क) के अधीन वर्णित सूची में से तीनों लोगों के जाने की भी संभावना है।
श्री कॉमथः मैं सहमत हूँ किन्तु खंड जैसा यह है, भाग (ख) में वर्णित व्यक्तियों के बहुमत को अपवर्जित करेगा क्योंकि वहां केवल दो सदस्य हैं जिसमें से एक निश्चित ही जिला न्यायाधीश होगा, जो (क) के अधीन सूची से है या किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश और दूसरा कोई अधिवक्ता होगा इसलिए, उनमें से दोनों अधिवक्ता नहीं होंगे..............मैं अपने मित्र श्री सतीश चन्द्र से सहमत हूं कि या तो खंड को स्थगित