34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 577

562 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

किया जाए या आप उस संशोधन की नोटिस की अनदेखी करें। जिसकी नोटिस उसने दी है, यदि आप नोटिस की अनदेखी करते हैं तो सदन में उसके संशोधन पर चर्चा होगी। अन्यथा यह उसके और सदन के लिए अनुचित होगा यदि उसके संशोधन को पेश करने की अनुज्ञा नहीं दी जाती और खंड को श्री उपाध्याय के संशोधन द्वारा यथासंशोधित रखा जाता है।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः मैं सोचता हूँ कि ऐसे खंड के बारे में काफी चर्चा की गई है जिसके बारे में इतना अधिक समय देने की आवश्यकता नहीं है।

श्री कॉमथः यह आपका मत है।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः यह मेरा मत है और मैं आशा करता हूं कि यही सदन का भी मत होगा।

श्री कॉमथः मैं आशा करता हूँ ऐसा नहीं है।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः मेरे सम्मानित मित्र श्री उपाध्याय के संशोधन को स्वीकार करने की खूबी यह है कि खंड 103 में अनुध्यात विस्तृत उपंबध को हटा दिया गया और मैं यह महसूस करता हूं कि यह उस सीमा तक प्रशंसनीय है। अन्य मुद्दा, जिसका सुझाव देना आप बेहतर समझते थे, यह है कि क्या खंड 104 का प्रचालन इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जारी रहना चाहिए कि पार्श्व मुद्दे के रूप में उच्च न्यायालय द्वारा विचार करने के अवसर को यदि मतभेद हो, तो हटा दिया जाए। मेरे सम्मानित मित्र के जोरदार आक्षेप के होते हुए भी मैं इसे यथावत् पारित किए जाने के पक्ष में हूँ, यदि सदन इसे अनुमोदित करे।

मैं सदन की स्वीकृति के लिए संशोधन की सिफारिश करता हूँ।

माननीय उपाध्यक्षः क्या यह तथ्य नहीं है कि जैसा कि विधेयक में मूलतः यह उपबंध था कि अध्यक्ष और सदस्य के बीच मतभेद की दशा में, मामला उच्च न्यायालय में उठाया जाए और वहां यह गारंटी थी कि दो न्यायिक अधिकारी मामले पर अपना निर्णय देंगे? पर उस उपबंध को अब समाप्त कर दिया गया है और अब नियुक्ति प्राधिकारी, अधिवक्ताओं में से दोनों सदस्य नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र है। विधेयक के उपबंधों और अपेक्षित संशोधन के बीच ऐसा क्रांतिकारी परिवर्तन क्यों किया जाना चाहिए, जिसमें ऐसे व्यक्ति आ सकते हैं जो राजनीति में भाग ले सकते हैं?

श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः जब तक नियुक्तियां करने की शक्तियां निर्वाचन आयुक्तों में निहित है, तब तक हम यह विचार करने का कार्य उस पर छोड़ते हैं कि ऐसे व्यक्ति जिसकी नियुक्ति की जा रही है, संदेह से परे हो।