34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 580

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श्री शिवचरण लालः चाहे उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में उसकी नियुक्ति एक मास पहले हुई हो।

श्री जे.आर. कपूरः केवल आशंका जो मेरे कुछ माननीय मित्रों के मस्तिष्क में हो रही है यह है कि इस बात की संभावना है कि अध्यक्ष के अलावा अधिकरण के दो सदस्य अधिवक्ता हो सकते हैं। उस आशंका को दूर करने के लिए- मैं थोड़ा संशोधन सुझाता हूँ।

डॉ. अम्बेडकरः मैंने अपने माननीय मित्र पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्याय से संशोधन लाने के लिए कहा है।

श्री जे.आर. कपूरः मेरा सुझाव है कि खंड 85 के उप-खंड (3) के भाग (ख) का निम्नलिखित रूप में संशोधन किया जाए, अर्थात् वर्तमान शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित शब्द रखे जाएंः

फ्(ख) निर्वाचन आयोग द्वारा चयनित दो सदस्य या तो उप-धारा (2) के भाग (क) के अधीन उसके द्वारा बनाई गई सूची में से या उपधारा (2) के अधीन उसके द्वारा बनाई गई प्रत्येक सूची में एक।य्

इसका यह अर्थ है कि अध्यक्ष से इतर सदस्य उप-धारा (2) के भाग (क) के अधीन बनाई गई सूची में से हो सकते हैं। ....यह मेरा संशोधन है और यदि आपकी अनुज्ञा हो तो मैं इसे पेश करूं।

पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्यायः इस कठिनाई को उप-खंड (3) के भाग (ख) में आने वाले फ्या तोय् शब्दों के लोप द्वारा दूर किया जाएगा। संशोधन इस प्रकार होगाः

फ्खंड 35 के उप-खंड (3) के भाग (ख) के फ्या तोय् शब्दों का लोप करें।य्

श्री जे.आर. कपूरः यह समस्या को नहीं निपटा पाएगा।

श्री सतीश चन्द्रः मैं भाग (ख) में फ्या तोय् शब्दों के स्थान पर फ्प्रत्येकय् शब्द रखने का सुझाव देता हूं।

माननीय उपाध्यक्षः यदि यह समझा जाए कि माननीय विधि मंत्री भी इस संशोधन से सहमत हैं जो हम इसे आसान कर सकते हैं। उप-खंड (3) के मद (क) में भी हम यह कह सकते हैं कि अध्यक्ष और एक अन्य सदस्य ऐसे व्यक्ति होंगे जो या तो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं या जो उप-खंड (2) (क) के अधीन सूची में हैं और एक अन्य सदस्य उप-खंड (2) (ख) के अधीन सूची में से होगा।