566 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकरः यदि फ्या तोय् बना रहता है तो यह संभव है कि उनमें से दोनों की नियुक्ति केवल एक सूची से हो सकती है। हम ऐसा नहीं चाहते। यदि हम फ्या तोय् शब्द निकाल दें तो वह संभावना नहीं रह जाती।
श्री जे.आर. कपूरः फिर भी यह रह जाती है।
माननीय उपाध्यक्षः यह आयोग को किसी भी सूची से नियुक्त करने से निवारित नहीं करता।
श्री टी.टी. कृष्णमाचारीः यहाँ प्रत्येक से एक होना चाहिए।
श्री कॉमथः फ्किसी में सेय् के बजाय यदि आप फ्प्रत्येक में सेय् करें, तो यह स्पष्ट और संदेह से मुक्त होगा।
माननीय उपाध्यक्षः फ्प्रत्येक सूची में से एकय्?
श्री जे.आर. कपूरः जिससे कि कोई अधिवक्ता निश्चित ही हमेशा वहां होगा।
डॉ. अम्बेडकरः मुझे कोई आपत्ति नहीं है। यदि आप लोगों को अधिवक्ताओं के विरुद्ध इतना अधिक पूर्वाग्रह है तो मैं क्या कर सकता हूँ?
माननीय उपाध्यक्षः मैं संशोधनों को उनके क्रम में रखूंगा। मैं सर्वप्रथम पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्याय का संशोधन रखूंगा। प्रश्न हैः
खंड 85 के उप-खंड (3) के भाग (ख) में फ्एक अन्य सदस्यय् शब्दों के स्थान पर फ्दो अन्य सदस्यय् रखें।
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
माननीय उपाध्यक्षः अब, दूसरा संशोधन यह है कि फ्दोनों में से कोई एकय् शब्दों के स्थान पर फ्प्रत्येक में से एकय् शब्द रखे जाएं।
डॉ. अम्बेडकरः यह बहुत कठिन स्थिति है।
माननीय उपाध्यक्षः मैं इसे माननीय मंत्री जी पर छोड़ता हूँ। क्या उनकी यह इच्छा है कि इसे स्थगित कर दिया जाए?
डॉ. अम्बेडकरः हां।
श्री करूणाकरण मेननः क्या मैं यह संकेत कर सकता हूं कि यह अधिकरण के सभी तीनों सदस्यों के सरकारी सेवकों से मिलाकर बनाने की संभावना को दूर कर देता है? पर यह उचित है या नहीं, यह विचारणीय विषय है।
माननीय उपाध्यक्षः यह संकेत किया गया है कि यह अधिवक्ताओं के लिए