568 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सम्मेलन बहुत लाभप्रद है, फिर भी अनेक माननीय सदस्य इसका फायदा नहीं उठाते। मैं उन सभी माननीय सदस्यों से आग्रह करता हूं कि सम्मेलन में एकत्र हों, जिससे कि जो कुछ वे यहां कहना चाहते हैं वे वहां विचार-विमर्श द्वारा सुलझा सकें और एक सहमति पर पहुंचने का प्रयास करें। यदि इसके बावजूद भी मतभेद रह जाता है, तो वे हमेशा सदन में आ सकते हैं और मतदान करा सकते हैं। किन्तु कई मामले जिसकी बाबत भ्रम हो सकता है अनौपचारिक रूप से सम्मेलन में विचार-विमर्श द्वारा सुलझाए जा सकते हैं और गलतफहमी दूर की जा सकती है।
डॉ. अम्बेडकरः प्रत्येक सदस्य आमंत्रित है।
माननीय उपाध्यक्षः यद्यपि पूरे सदन का किसी समिति को यह औपचारिक निर्देश नहीं है, यह उतना ही है, जैसा उचित है। अतः माननीय सदस्यों को चाहिए कि वे वहां बैठें, अपने विचार व्यक्त करें और संशोधनों का समर्थन करें या विरोध करें और निष्कर्ष निकालें। मुझे आशा है कि अधिकांश चर्चा कल होगी और कई खंडों पर विचार किया जाएगा।
श्री कॉमथः आपका सुझाव केवल उन्हीं विषयों की बाबत लागू होगा, जहां राय में मतैक्य है। यदि मतभेद है तो उनकी चर्चा यहां होनी चाहिए।
डॉ. अम्बेडकरः बहुमत विनिश्चय को अवश्य ही स्वीकार किया जाना चाहिए।
श्री कॉमथः कतई नहीं।
माननीय उपाध्यक्षः मतैक्य हमेशा कुछ प्रतिशत होता है। जहां तक संभव हो शंकाओं को सम्मेलन में दूर कर लिया जाएगा।
सदन अब कल 8.30 बजे तक स्थगित किया जाता है।
तब सदन 24 मई, 1951, वृहस्पतिवार को साढ़े आठ बजे तक स्थगित किया गया।
ऽलोक प्रतिनिधित्व (सं. 2) विधेयक- जारी
माननीय अध्यक्षः सदन अब लोक प्रतिनिधित्व (सं. 2) विधेयक की आगे चर्चा आरंभ करने की कार्यवाही करेगा।
93वें खंड तक का निपटान कल तब हो गया था, जब माननीय विधि मंत्री के साथ शेष खंडों पर रखे गए संशोधनों की अनौपचारिक चर्चा के लिए सदन को स्थगित कर
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 23 मई, 1951, पृष्ठ 9296-9305