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दिया गया था। सदन अब खंड 94 पर विचार आरंभ करेगा। मैं यह जानना चाहता हूं कि सदस्यों के बीच अनौपचारिक सम्मेलन का क्या परिणाम रहा।
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः श्रीमन्, हमने खंड 135 तक काफी लंबी चर्चा की। किन्तु मैं अब भी 11 बजे या साढ़े ग्यारह बजे तक स्थगित करने के लिए आपकी और सदन की अनुज्ञा की मांग कर रहा हूं। यह हमारे लिए आवश्यक है, क्योंकि मैं पूरे कार्य को समाप्त करने के लिए पुनः एक बैठक करना चाहता हूं। कठिनाई यह है कि दोपहर में एक दूसरी बैठक है और इस मामले पर चर्चा करने के लिए बैठक करना सदन की समिति के लिए संभव नहीं होगा। मैं आशा करता हूं कि आप इस अनुग्रह को स्वीकार करेंगे।
माननीय अध्यक्षः मैं पहले भी उठने के लिए तैयार हूं बशर्ते हम इसे समाप्त कर सकें।
डॉ. अम्बेडकरः कठिनाई यह है कि प्रत्येक सदस्य स्वयं को एक संभावित सदस्य समझता है जब वह इस विधेयक पर चर्चा करता है। अतः वह उन सभी प्रकार की कठिनाइयों पर विचार करता है जो उसके मार्ग में आ सकती हैं।
एक माननीय सदस्यः मंत्री को शामिल करके।
माननीय अध्यक्षः जब उन्होंने सभी सदस्य का उल्लेख किया है तो निश्चित ही उनमें मंत्री भी सम्मिलित हैं।
अब मैं उसी प्रक्रिया का अनुसरण करूंगा, जिसका अनुसरण मैंने कल किया था। मैं सर्वप्रथम पूछूंगा कि क्या कोई संशोधन लाया जाने वाला है और यदि हां, तो किस
खंड हेतु। खंड 94 से खंड 97 तक कोई संशोधन नहीं है।
खंड 94 से 97 तक, विधेयक में जोड़े गए।
खंड 98 (अधिकरण द्वारा अन्य आदेश)
श्री जे.आर. कपूर (उत्तर प्रदेश)ः पंडित ठाकुर दास भार्गव के नाम से दो संशोधन हैं। उनके अनुपस्थित होने के कारण यदि आप मुझे अनुज्ञा दें, तो मैं शब्दावली में कुछ परिवर्तनों सहित उन्हें पेश करूं।
माननीय अध्यक्षः क्या वे स्वीकृत संशोधन हैं?
श्री जे.आर. कपूरः जी हां।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः
फ्कि यथासंशोधित खंड 119 को विधेयक में जोड़ा गया।य्