584 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैं नहीं जानता कि सदन अपना बचाव कैसे करेगा। यों किसी सदस्य को दंड देने का मेरा इरादा नहीं है।
श्री कॉमथः डॉ. देशमुख ने कभी संशोधन वापस नहीं लिया।
माननीय उपाध्यक्षः उन्होंने इस पर बल नहीं दिया। मैंने सही या गलत यह निष्कर्ष निकाला कि यह प्रस्ताव सदन के समक्ष नहीं है। क्या यह अंतिम बात नहीं है?
श्री कॉमथः डॉ. देशमुख का अभिप्राय है कि वे सदन के मत के लिए इस पर बल नहीं दे रहे हैं।
डॉ. देशमुखः मैं किसी ऐसी बात पर जो हो चुकी है, फिर से वापस हीं जाना चाहता। किन्तु कई मामलों में चर्चा हुई है, यद्यपि प्रस्ताव औपचारिक रूप से नहीं पेश किया गया और यहां तक कि दो या तीन भाषणों के बाद भी, प्रस्ताव पेश नहीं किया गया। इस तरह के भी पूर्वोदाहरण हैं।
माननीय उपाध्यक्षः मैं माननीय सदस्यों को यह सुझाव दे रहा हूं कि यदि कोई माननीय सदस्य अपना संशोधन सदन के समक्ष रखे जाने और सदन द्वारा सुने जाने पर बल देता है तो उसके पास इसे पेश करने और सदन द्वारा इसे सुने जाने पर बल देने का साहस होना चाहिए। किन्तु यदि वह मुझसे इस सदन के समक्ष नहीं करने की वांछा रखता है तो वह अध्यक्ष को उस पर चर्चा की अनुमति देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः ऐसा किसी संशोधन को, जिसे सदन के समक्ष रखे जाने के लिए नहीं कहा गया है, सदन में चर्चा किए जाने का दावा करने का अधिकार नहीं है।
माननीय उपाध्यक्षः मैं अब आगे कार्यवाही आरंभ करूंगा।
श्री कॉमथः सीट से उठेµ
श्री सिधवाः व्यवस्था बनाए रखें, व्यवस्था बनाए रखें।
श्री कॉमथः आपके पास मुझसे व्यवस्था के लिए कहने का कोई अधिकार नहीं है।
माननीय उपाध्यक्षः सदन अब अपना सामान्य कार्य जारी रखने की कार्यवाही करेगा।
खंड 159 (परिसर का अधिग्रहण)
संशोधन किया गयाः
खंड 159 के उप-खंड (1) में निम्नलिखित पंरतुक जोड़ा गयाः