590 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
खंड 7 (सदस्यता के लिए निरर्हता)
श्री श्यामनन्दन सहाय (बिहार)ः हमने डॉ. अम्बेडकर के संशोधनों में संशोधन किए हैं। यह बेहतर है कि हम इस खंड पर कल चर्चा करें। हमारे पास अब समय भी नहीं है।
माननीय उपाध्यक्षः उन्हें आज ही लिया जा सकता है। सभी नोटिसों को छोड़ दिया जाएगा।
डॉ. अम्बेडकरः श्रीमन्, मैं इस उपांतरण के साथ 7क लाता हूँ, अर्थात् उप-खंड (च) में, फ्ऐसे सदस्यय् शब्दों के स्थान पर फ्यथास्थिति, संसद सदस्य या विधायकय् शब्द रखे गए हैं। मैं प्रस्ताव लाने की अनुमति चाहता हूं।
खंड 7 के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखेंः
7 . संसद या किसी विधानसभा की सदस्यता के लिए निरर्हताएंः कोई व्यक्ति संसद के किसी सदन या विधानसभा या राज्य के विधान परिषद के सदस्य के रूप चुने जाने या सदस्य होने से निरर्हित होगाµ
(क) यदि संविधान के प्रारंभ के पूर्व या पश्चात् दोषसिद्ध हो चुका है, या किसी
निर्वाचन की विधिमान्यता या नियमितता के प्रश्न की कार्यवाहियों में किसी
अपराध या भ्रष्टता या अवैध व्यवहार का दोषी पाया गया है, जो धारा 138 या
धारा 139 द्वारा संसद या प्रत्येक राज्य के विधानमंडल की सदस्यता के लिए
निरर्हता वाला अपराध या व्यवहार होना घोषित किया गया है जब तक ऐसी
अवधि व्यतीत नहीं हो गई है जो यथास्थिति उक्त धारा 138 या धारा 139 में
उस बाबत उपबंध किया गया है_
(ख) यदि संविधान के प्रारंभ के पूर्व या पश्चात् उसे भारत में किसी न्यायालय
द्वारा किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है और पारगमन के लिए
दंडादिष्ट किया गया है या कम से कम दो वर्षों के लिए कारावास में डाला
गया है जब तक पांच वर्ष की अवधि या ऐसी कम अविधि जो निर्वाचन
आयोग ने किसी विशिष्ट मामले में अनुज्ञात की है, उसकी रिहाई के बाद से
उतना समय बीत गया है_
(ग) यदि ससंद या किसी राज्य के विधानमंडल के उम्मीदवार के रूप में नामनिर्दिष्ट
होने या इस पर नामनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति का निर्वाचन अभिकर्ता के रूप में
वह इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन अपेक्षित समय और रीति से निर्वाचन
व्यय वापस करने में असफल रहता है जब तक उस तारीख से पांच वर्ष का
समय व्यतीत हो गया है जिसके द्वारा वापसी दर्ज कराई जानी थी या निर्वाचन
आयोग ने निरर्हता दूर कर दी है_