592 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(घ) कोई व्यक्ति उस धारा के खंड (घ) के अधीन निरर्हित नहीं होगा, यदि
निदेशक होने के कारण उसे इस प्रकार धारक को निरर्हित करने के लिए संसद
की विधि द्वारा घोषित न किया गया हो।
(च) उस धारा के खंड (घ) के अधीन निरर्हता निदेशक की दशा में प्रभावी
नहीं होगा, जहां ऐसे निदेशक के पद की बाबत इस धारा के खंड (घ) में
यथानिर्दिष्ट ऐसी कोई घोषणा करने वाली विधि, निदेशक के यथास्थिति संसद
या विधानमंडल का सदस्य चुने जाने के पश्चात् प्रवृत्त हुआ है। उस तारीख के
पश्चात् छह मास की समाप्ति तक जिसको ऐसी विधि प्रवृत्त होती है या ऐसी
लंबी अवधि जो निर्वाचन आयोग किसी विशिष्ट मामले में अनुज्ञात करे_
(छ) उस धारा के खंड (च) के अधीन निरर्हता इस अधिनियम के अधीन प्रथम
निर्वाचनों के लिए किसी उम्मीदवार की दशा में लिखित रूप में अभिलिखित
किए गए कारणों से निर्वाचन आयोग द्वारा हटायी जा सकेगी।
7 ख निर्वचन आदिµ (1) इस अध्याय मेंµ
(क) फ्समुचित सरकारय् से संसद के किसी सदन का सदस्य होने या चुने जाने के
लिए किसी निरर्हता के संबंध में फ्भारत सरकारय् और राज्य की विधानसभा या
विधान परिषद का सदस्य होने या चुने जाने के लिए किसी अनर्हता के संबंध
में फ्उस राज्य की सरकारय् अभिप्रेत है।
(ख) फ्पब्लिक कंपनीय् से भारतीय कंपनी अधिनियम, 1913 (1913 का 7) की
धारा 2 में यथा परिभाषित पब्लिक कंपनी अभिप्रेत है।
(2) शंका को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां धारा 7
के खंड (घ) में यथानिर्दिष्ट ऐसी कोई संविदा हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब और
समुचित सरकार द्वारा या उसकी ओर से की गई है, तो वहां उस कुटुम्ब का
प्रत्येक सदस्य उक्त खंड (घ) में वर्णित अर्हता के अधीन हो जाएगा। किन्तु
जहां किसी हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के किसी सदस्य द्वारा ऐसे कारबार के
अनुक्रम में पृथक् कारबार करते हुए संविधा की गई है, वहां उस कारबार में
कोई शेयर या हित न रखने वाले उक्त कुटुम्ब का कोई अन्य सदस्य ऐसी
निरर्हता के अधीन नहीं होगा।
(3) यदि कोई प्रश्न इस संबंध में उठाया जाता है कि क्या ऐसा व्यक्ति धारा 7 के
खंड (च) में निर्दिष्ट कोई पद धारित करते हुए बर्खास्त किया गया है, संसद के
किसी सदन या किसी राज्य को विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य के रूप
में चुने जाने के लिए उस खंड के अधीन निरर्हित है, तो निर्वाचन आयोग द्वारा