34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 611

596 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

की रिपोर्ट के पुराने उपबंध के बीच मध्यम मार्ग है कि उन्हें सिविल और दंड प्रक्रिया संहिताओं के अधीन दिए गए हैं, के उत्सादन के बिना संसद के सदस्य के लिए अर्ह हो जाएंगे और सदन के अन्य सदस्यों द्वारा प्राप्त अन्य हैसियत के लिए भी अर्ह हो जाएंगे जिससे उन्हें निर्वाचन के लिए खड़े होने से सीधे-सीधे निरर्हित हो जाना चाहिए था।

मैं आशा करता हूं कि सदन इस संशोधन को स्वीकार करेगा, क्योंकि यह एक मध्यम मार्ग है।

मौलवी वाजिद अली (असम)ः क्या मैं माननीय विधि मंत्री जी से एक प्रश्न पूछ सकता हूं? यदि उम्मीदवार चुने जाने में असफल रहता है या कुछ कारणों से या अन्यथा निर्वाचन में खड़ा नहीं होता, तो क्या यह छूट बनी रहेगी या तब उन्हें इसे पुनरुज्जीवित करना होगा?

डॉ. अम्बेडकरः संरक्षण का निलम्बन, नामांकन और निर्वाचन की समाप्ति की अवधि के दौरान ही लागू होगा।

डॉ. पट्टाभि (मद्रास)ः क्या उसे निर्वाचन के सभी नैसर्गिक परिणामों से जूझना होगा?

डॉ. अम्बेडकरः वह निर्वाचन के सभी परिणामों के अधीन होगा।

प्रो. के.टी. शाहः क्या मैं पूछ सकता हूं कि सदन इस सिद्धांत के प्रति वचनबद्ध है कि शासकों को निर्वाचन में खड़े होने के लिए अनुज्ञा दी जाए?

माननीय उपाध्यक्षः विधेयक में ऐसा कोई निर्बंधन नहीं है जैसा यह प्रवर समिति से आया है। अभी संविधान या विधेयक में, किसी शासक को उम्मीदवार के रूप में

खड़े होने पर कोई प्रतिषेध नहीं है, जैसे यह प्रवर समिति से आया है। अतः माननीय सदस्य को यह प्रश्न दूसरी तरह से पूछना चाहिए।

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

नया खंड 166क विधेयक में जोड़ा गया।

खंड 167 (नियम बनाने की शक्ति)

डॉ. अम्बेडकरः मैं यह प्रस्ताव लाने की अनुमति चाहता हूँः

खंड 167 के उप-खंड (2) के भाग (ग) के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित करेंः

फ्(गग) ऐसी रीति जिसमें पीठासीन अधिकारी, मतदान अधिकारी, मतदान अभिकर्ता या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा मतदान दिया जाना है, जो किसी निर्वाचन-क्षेत्र से मतदाता