600 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
यह एकमात्र संशोधन है जो मेरा है और मैं पूर्ण दृढ़ता के साथ इस पर विचार कराना चाहूंगा, क्योंकि यह कायम रखने योग्य है और मैं आशा करता हूं कि माननीय विधि मंत्री भी इस पर कुछ ध्यान देंगे, जो मैंने इस अवसर पर कहा है।
डॉ. अम्बेडकरः मैं समझता हूं मैं हमेशा ऐसा करता हूँ।
ऽमाननीय अध्यक्षः संशोधन पेश किया गयाः
खंड 7 के उप-खंड (1) के भाग (च) में, फ्पांच वर्षय् शब्दों के स्थान पर फ्तीन वर्षय् शब्द रखें।
डॉ. अम्बेडकरः मैं वही प्रक्रिया अपनाना चाहता हूं जो मैंने अधिकांश संशोधनों के संबंध में अपनाई है, अर्थात् खड़े होकर यह कहना कि मैं इन संशोधनों को स्वीकार करने की प्रस्थापना नहीं करता। इस मामले में, एक अपवाद भी कुछ हद तक आवश्यक प्रतीत होता है, क्योंकि कुछ प्रश्न उठाए गए हैं जिन पर कुछ स्पष्टीकरण दिए जाने की आवश्यकता है, ऐसा मैं सोचता हूं।
सर्वप्रथम, मैं अपने माननीय मित्र को उत्तर देना चाहूंगा जिन्होंने यह कहा कि सदन इस समय खंड 7 लाकर इसे विधेयक पर बहस के अंतिम पड़ाव पर विस्मित हो गया है। यह बिल्कुल सही है कि खंड 7 को आज ही औपचारिक रूप से सदन के समक्ष लाया गया है। किन्तु मैं सोचता हूं कि मेरे मित्र इस पर सहमत होंगे कि इस विधेयक में ऐसा कोई खंड नहीं है, जिस पर संपूर्ण सदन ने अनौपचारिक रूप से इतना अधिक ध्यान दिया हो, जितना खंड 7 पर दिया गया है।
डॉ. एस.पी. मुखर्जी (पश्चिमी बंगाल)ः अति महत्वपूर्ण खंड।
डॉ. अम्बेडकरः मैं उन बैठकों की संख्या को स्मरण नहीं कर सकता जो वृहत् समिति जो नियुक्त की गई थी, की प्रवर समिति और संपूर्ण सदन की समिति की हुई थीं। अतः मैं यह नहीं सोचता कि इस प्रतिवाद का कोई आधार है, कि खंड 7 के उपबंधों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। मैं सोचता हूं कि औचित्य की दृष्टि से और व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने की दृष्टि से इस खंड की काफी हद तक पड़ताल की गई है।
श्रीमन्, अब मैं कुछ व्यक्तिगत मुद्दे उठाऊंगा जो कई वक्ताओं द्वारा उठाए गए हैं। मैं उस पर कोई ध्यान नहीं दूंगा जो मेरे मित्र श्री कामथ ने कहा है और मैं नहीं समझता कि वे गूंगे और बहरे व्यक्तियों को निकालने का उपबंध करने के अपने सुझाव पर अधिक ध्यान दिए जाने की प्रत्याशा करते हैं।
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 28 मई, 1951, पृष्ठ 9564-70