34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 617

602 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडकरः निरर्हता गवर्नरµजनरल द्वारा हटाई गई। कुछ मामलों में समय बीत गया था और कुछ मामलों में वह निरर्हता हटाने का आदेश देने में समर्थ थे। यहाँ दूसरा मुद्दा है। वह उन मुद्दों के संबंध में है जो पब्लिक कंपनी निदेशक, आदि के बारे में उठाये गये हैं। मैं सोचता हूं कि मेरे लिए यह खंड जैसा है, उसका प्रतिवाद करना अनावश्यक है।

इन सभी मुद्दों को विभिनन बैठकों में उठाया गया था, जहां इन प्रश्नों पर विचार किया गया था और अंततः समिति ने यह निष्कर्ष निकाला कि इस खंड को ऐसे ही रहने दिया जाए, जैसा यह उस समिति के मध्य भी था। अतः मैं इस प्रश्न के संबंध में बहुत विस्तार से परिशीलन करने का प्रस्ताव नहीं करता।

श्री सोंधीः सहकारी सोसाइटी।

डॉ. अम्बेडकरः मैं उस पर आ रहा हूं।

श्री जे.आर. कपूरः .............के संबंध में अनौपचारिक बैठक में कोई निश्चित विनिश्चय नहीं हुआ था।

डॉ. अम्बेडकरः मैं विस्तार से उस पर परिशीलन करने का प्रस्ताव नहीं करता, जो अनौपचारिक बैठक में हुआ था, क्योंकि हमसे यह उद्धाटित करने की अपेक्षा नहीं है वहां क्या हुआ।

श्री जे.आर. कपूरः ...............लिमिटेड कंपनी में वित्तीय हित की मात्रा?

डॉ. अम्बेडकरः जैसा मैंने कहा, अंततः यह स्थिति है कि कैसे खंड उद्भूत हुआ। सहकारी सोसाइटी के प्रश्न मे संबंध में, न तो मैं स्वयं कोई वचन देना चाहता हूँ और न ही मुझे ऐसी विधिक स्थिति को व्यक्त करने का अपना अभिप्राय या आशय स्पष्ट करना चाहिए जिसमें मैं हर समय आबद्ध रहूं। मुझे यह नहीं लगता कि सहकारी सोसाइटी का गठन किसी पृथक् विधि के अधीन किया गया है, अतः जैसा कि हम भारतीय कंपनी अधिनियम के अधीन निगमित पब्लिक कंपनी को निर्दिष्ट कर रहे हैं, मेरे वर्तमान निर्णय के अनुसार उसमें फ्सहकारी सोसाइटीय् का अपवर्जन प्रतीत होता है।

अब मैं अधिवक्ताओं से संबंधित प्रश्न पर आता हूं। मैं यह नहीं जानता कि क्या मेरे मित्र श्री चौधरी चले गए हैं (एक माननीय सदस्यः वह यहां हैं)। इसमें दो भिन्न-भिन्न प्रश्न रखे गए हैं। श्री चौधरी द्वारा रखा गया प्रश्न यह हैः ऐसे अनेक लोगों से मेरा अभिप्राय अधिवक्ताओं से है, जिन्हें विभिन्न सरकारों द्वारा अपने सरकारी अधिवक्ताओं के रूप में लगाया जाता है। तब या तो उन्हें वेतन दिया जाता है या उन्हें फीस दी जाती है और प्रत्येक मामला जो वे लेते हैं, उस पर उन्हें विहित दरों के अनुसार कतिपय धनराशि दी जाती है। वे चाहते हैं कि ऐसे किसी सरकारी अधिवक्ता को जिसे किसी सरकार