34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 619

604 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडकरः यही ठीक बात है।

श्री हुसेन इमामः क्या माननीय मंत्रियों द्वारा संसद के किसी अधिवक्ता सदस्य से भेंट करने से इनकार किया गया?

श्री जवाहरलाल नेहरूः जहां तक मैं जानता हूं, अधिवक्ताओं द्वारा मंत्रियों के समक्ष अधिवक्ता के रूप में उपस्थित होने का कोई मामला नहीं आया है।

डॉ. अम्बेडकरः मैं नहीं जानता कि यह क्या है? किन्तु यह वह कथन है जो उन्होंने किया था। मैं सोचता हूं कि इस विषय को उसी रीति से विनियमित किया जा सकता है, जैसा मैंने सुझाव दिया है। अतः, उस स्थिति के लिए किसी विधिक उपबंध की आवश्यकता नहीं है।

अब मैं अपने माननीय मित्र पंडित कुंजरू द्वारा लाए गए संशोधन पर आता हूं। वे फ्राज्य के प्रति अनिष्ठाय् शब्द को छोड़ देना चाहते हैं। कुछ हद तक, मैं उनके तर्क को स्वीकार करता हूं कि फ्राज्य के प्रति अनिष्ठाय् शब्द रचना बहुत संक्षिप्त मुहावरा नहीं है। इसका क्या अर्थ है? यह कहीं परिभाषित नहीं किया गया है। किन्तु मुद्दा यह है कि जब प्रवर समिति ने इस विषय पर चर्चा की थी तो वे राज्य के दो विभिन्न प्रवर्गों के सेवकों पर विचार कर रहे थे। एक सिविल सेवाओं के कार्मिक का था। साथ ही वे सेना के कार्मिकों पर भी विचार कर रहे थे। उनके निर्णय में, किसी सेना अधिकारी के द्वारा ऐसा कार्य करना संभव था जो राज्य की सुरक्षा को क्षीण करता हो या ‘राज्य के प्रति अनिष्ठा’ का कार्य होना साबित होता हो और उस आधार पर ही उसे बर्खास्त किया जा सकता हो। वे भ्रष्टाचार के निर्बंधन को सिविल सेवकों तक ही सीमित नहीं करना चाहते थे। वे यह उपबंध किसी सेना अधिकारी द्वारा किए गए किसी कार्य तक भी बढ़ाना चाहते थे। अतः मैं स्वीकार करता हूं कि संक्षिप्त मुहावरे का उपयोग करना संभव नहीं है। किन्तु मैं इस पर यह कहना चाहता हूं कि खंड 7 के एक भाग में पर्याप्त संरक्षण है, जहां इस प्रश्न पर कि क्या भ्रष्ट आचरण या अनिष्ठा के लिए किसी व्यक्ति को वस्तुतः बर्खास्त कर दिया जाए, निर्वाचन आयोग द्वारा विनिश्चय किए जाने हेतु छोड़ दिया गया हैं। मैं यह निवेदन करता हूं कि यदि निर्वाचन आयुक्त एक स्वतंत्र अधिकारी है और मुझे पूरी आशा और विश्वास है कि वह एक स्वतंत्र अधिकारी रहेगाµमैं सोचता हूं कि खंड 7 के पूर्व भाग में अंतर्विष्ट उपंबंधों के किसी प्रकार के दुरुपयोग के विरुद्ध उप-खंड (3) में पर्याप्त संरक्षण है।

मैं नहीं समझता कि किसी माननीय सदस्य द्वारा ऐसा कोई अन्य मुद्दा उठाया गया है जिस पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता हो और जिस पर हमने उत्तर के अनुक्रम में विचार न किया हो।

श्री कॉमथः श्रीमन्, मैं आपका ध्यान डॉ. अम्बेडकर से थोड़ी चूक की ओर