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श्री जवाहरलाल नेहरूः मेरे माननीय बन्धुजनों ने कमोवेश स्थिति स्पष्ट कर दी है। हम उपाधियों की इस लंबी सूची के प्रति समर्पित नहीं हैं जिसमें से आधे के बारे में मैंने अपने जीवन में कभी नहीं सुना है। वे प्रवर समिति द्वारा प्रस्तावित थे और वे अंगीकृत किए गए। हम अब या सदस्यों के परामर्श से बहुत सावधानीपूर्वक इस सूची का तीसरे वाचन में परिशीलन करते समय उनमें से ऐसों को जो वहां नहीं होने चाहिए, निकालने के लिए पक्के तौर पर तैयार हैं।
श्री भट्टः फ्पाटिलय् की भी यही स्थिति है।
डॉ. अम्बेडकरः विभिन्न राज्यों से यह पता लगाना संभव होगा कि क्या उनमें से कोई सरकारी कर्मचारी है। किन्तु पाटिल के संबंध में मैं यह कह सकता हूं कि मैं उसे जानता हूंµऔर पटिल के बारे में मुझसे अधिक कोई नहीं जानता।
डॉ. देशमुखः आप मध्य प्रदेश के बारे में नहीं जानते।
डॉ. अम्बेडकरः मैं मध्य प्रदेश के बारे में भी जानता हूँ।
कुछ माननीय सदस्यः खड़े हो गएµ
माननीय अध्यक्षः अब हम ऐसे मुद्दे पर चर्चा को बढ़ा रहे हैं जिस पर विचार की आवश्यकता है किन्तु जिसे बिना समय गंवाए पारस्परिक सहमति और समझौते द्वारा निपटाया जा सकता है। अतः, मैं विधि मंत्री जी को यदि सदन सहमत हो और वह सहमत हों, यह सुझाव देता हूं कि हम इस क्षण इसको नहीं सुलझा सकते कि क्या लम्बरदार को हटाया जाए या पाटिल को हटाया जाए या अन्य व्यक्तियों को हटाया जाए। कुल मिलाकर, जैसा कि सदन के माननीय नेता ने कहा कि ये विभिन्न उपाधियां हैं जिनके द्वारा इन लोगों को जाना जाता है। सदस्य अनौपचारिक रूप से इस विषय पर चर्चा कर सकते हैं। कमोवेश यह वस्तुतः प्ररूप का विषय है और इसे दो या तीन दिनों के पश्चात् लिया जा सकता है, जब हम विधेयक का तीसरा वाचन करेंगे।
डॉ. अम्बेडकरः इसे तब तक आरक्षित किया जा सकता है।
माननीय अध्यक्षः उस प्रयोजन के लिए इसे आरक्षित करने की आवश्यकता नहीं हैं। वे इस खंड को पारित कर सकते हैं। ये केवल औपचारिक विषय है और सारवान विषय नहीं है। सारवान बात यह है कि लाभ का पद धारण करने वाला सरकारी कर्मचारी वहां नहीं होना चाहिए। मैं नहीं सोचता कि हमें इन बातों पर अपना समय खर्च करने की आवश्यकता है।
डॉ. अम्बेडकरः लम्बरदार के विरुद्ध मेरा क्या हित है? मैं लम्बरदार नहीं हूं।
माननीय अध्यक्षः शांत रहें, शांत रहें।