612 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकरः यदि आप मुझे बम्बई के वतन अधिनियम के अधीन पुकारना चाहें, तो मैं एक निकृष्ट ग्राम अधिकारी हूं।
डॉ. देशमुखः व्यवस्था के प्रश्न पर क्या मैं यह जान सकता हूं कि अब क्या होगा, क्योंकि आपने शीघ्रता से मेरे संशोधन को मत के लिए प्रस्तुत कर दिया और यह सदन द्वारा नामंजूर कर दिया गया। यह बेहतर होता कि सदन और प्रत्येक व्यक्ति को उचित बात का पता चलता। मैं अपने माननीय मित्र के भाषण के प्रति कृतज्ञ हूं।....
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य यह कहकर अपना ही पक्ष बिगाड़ रहे हैं कि सदन में बेहतर अर्थ निकाला गया है। यह कार्य-व्यापार का किसी समझौते द्वारा या शांतिपूर्ण समाधान द्वारा हल निकालने का तरीका नहीं है।
ऽखंड 123 (छोटे भ्रष्ट आचरण)
संशोधन किया गयाः
खंड 123 के उप-खंड (5) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखेंः
फ्(5) उम्मीदवार के निर्वाचित होने की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय चिह्न जैसे धार्मिक और राष्ट्रीय प्रतीक के उपयोग या उनके प्रति अपील करने या जाति, मूलवंश, समुदाय या धर्म के आधार पर मत देने या मत देने से विरत रहने की क्रमबद्ध अपील करना।य्
माननीय अध्यक्षः मैं सोचता हूं, कोई अन्य संशोधन नहीं है।
श्री कॉमथः समेकित सूची सं. 2 पूरक सूची सं. 4 में मेरे दो संशोधन सं. 5 और 6 हैं। मैं केवल सं. 5 को ला रहा हूं।
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
मैं चाहता हूं कि प्रारूपकार यह देखने के लिए इस पर कुछ ध्यान देंगे कि क्या इसे परिवर्तित किया जा सकता है जिससे किसी उम्मीदवार या उसके अभिकर्ता के अलावा किसी व्यक्ति को इसकी परिधि के भीतर लाया जा सके।
डॉ. अम्बेडकरः मैं इस विषय पर विचार करूंगा।
श्री कॉमथः यदि प्रारूपकार इस पर विचार करेंगे तो मैं इस पर बल नहीं दूंगा।
माननीय अध्यक्षः वह इस पर विचार करेगा।
ऽसं. वा., खंड 12, भाग II, 28 मई, 1951, पृष्ठ 9598