34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 630

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ऐसा करने का मेरा उद्देश्य यह है कि निर्वाचन के प्रतिनिर्देश वाले ऐसे किसी परिपत्र, इश्तहार या पोस्टर को जिस पर प्रकाशक और मुद्रक का नाम और पता नहीं हो, जारी किया जाना अवैध आचरण है।

माननीय अध्यक्षः यदि मैं भूला नहीं हूं, तो ऐसे उपबंध आज भी निर्वाचन के संबंध में नहीं हैं।

डॉ. अम्बेडकरः हां, इसमें कोई नई बात नहीं है।

श्री आर.के. चौधरीः इसका बहुत गंभीर परिणाम होता है। यदि यह किसी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता तो यह अवैध आचरण नहीं होना चाहिए। यहां पर्याप्त दंड दिलवाया गया है, किन्तु क्यों निर्दोष उम्मीदवार को दंडित किया जाए, यदि कुछ व्यक्ति जानकारी के बिना निर्वाचन के समय फ्इनको और इनको मतदान दोय् कहकर परिपत्र प्रकाशित करते हैं। तो इससे निर्वाचन अवैध हो जाएगा और उसे निरर्हता से दंडित किया जाएगा।

पंडित ठाकुर दास भार्गवः मैं यह कहना चाहता हूं कि मैं नहीं सोचता कि हम इस खंड को हटाने की स्थिति में हैं। किन्तु वहीं मेरे मित्र श्री आर.के. चौधरी द्वारा उठाए गए इस तर्क में काफी बल है कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह का कार्य करता है तो यह तब तक उम्मीदवार को प्रभावित नहीं करेगा जब तक उम्मीदवार को इसकी जानकारी न हो या वह इसकी मौनानुकूलता न देता हो। धारा 124 के अधीन इसे अवैध बनाना बेहतर होगा।

अब धारा 99 के संबंध में इसका भी उम्मीदवार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उस बैठक में यह आम राय थी जिसमें इस प्रश्न पर विचार किया गया था। अतः, मैं यह अनुरोध करता हूं कि धारा 99 पर बाद में विचार किया जाए।

डॉ. अम्बेडकरः उस पर विचार किया जाए।

माननीय अध्यक्षः इसका यह अभिप्राय है कि इस खंड को वैसा ही रखा जाए जैसा यह है।

पंडित कुंजरूः मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित किए गए संशोधन का जोरदार विरोध करता हूं। आप संशोधन से यह पाएंगे कि जो यह प्रस्ताव करता है वह यह नहीं है कि कोई दल अपने उम्मीदवारों के पक्ष में सामान्य प्रचार करेगा। किन्तु कोई दल वह करने के लिए स्वतंत्र होगा जो वह विशिष्ट उम्मीदवारों का समर्थन करना चाहिए, प्रत्येक जगह मान्यताप्राप्त है किन्तु यह विशिष्ट उम्मीदवारों का समर्थन करने वाला होना चाहिए और उसके द्वारा उपगत व्यय साधारण निर्वाचन प्रचार में न करे किसी विशिष्ट उम्मीदवार के समर्थन में किया गया उस उम्मीदवार के निर्वाचन व्ययों की विवरणी में