34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 632

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माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः

फ्यथासंशोधित खंड 124 विधेयक का भाग बन गया।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

यथासंशोधित खंड 124, विधेयक में जोड़ा गया।

खंड 132, 130 और 150

माननीय अध्यक्षः अब खंड 132, 139 और 150 हैं। इन खंडों में कोई संशोधन नहीं हैं इसलिए मैं इन्हें एक साथ रखूंगा।

प्रश्न हैः

फ्कि खंड 132, 139 और 150 विधेयक का भाग बन गया।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

खंड 132, 139 और 150 विधेयक में जोड़ा गया।

खंड 167 (नियम बनाने की शक्ति)

माननीय अध्यक्षः अब खंड 167 पर डॉ. अम्बेडकर का संशोधन है।

डॉ. अम्बेडकरः मैंने पहले ही इसे प्रस्तुत कर दिया है। इसके बारे में कोई आलोचना नहीं थी, अतः मुझे उसके बारे में संक्षेप में अपनी स्थिति स्पष्ट कर देनी चाहिए। इस

खंड के बारे में दो या तीन प्रश्न उठाए गए थे। एक ऐसे किसी अधिकारी के बारे में था जिसका स्थानांतरण उस निर्वाचन-क्षेत्र से हो गया है जिसमें उसका नाम किसी अन्य स्थान पर रजिस्टर में था। प्रश्न थाः उसके मतदान के लिए क्या उपबंध किया जाने वाला है? दूसरा प्रश्न ऐसे उम्मीदवार के संबंध में था जो निर्वाचन के प्रयोजन के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य को जाता है। वहां भी, वही प्रश्न उठाया गया था। अंततः, ऐसे उम्मीदवार के संबंध में प्रश्न किया गया था जो पक्ष प्रचार के प्रयोजन के लिए अपने निजी निर्वाचन-क्षेत्र में घूम रहा है और जो उपस्थित नहीं है या जिसके अपने उस मतदान बूथ पर उपस्थित होने की संभावना नहीं है जहां उसे मत देने का हक है।

इस पर मैंने प्रारूपकार से पूछा है। प्रारूपकार का यह सोचना है कि मेरे संशोधन में इस विशिष्ट खंड में उपबंध करना अनावश्यक है, क्योंकि इन सभी मामलों हेतु नियम बनाने के लिए खंड 167 में अंतर्विष्ट साधारण उपबंध में काफी गुंजाइश है। अतः नियमों द्वारा इन मामलों से निपटने के लिए नियमों के अधीन निर्वाचन आयुक्त के लिए ऐसा करना संभव है और यहां कोई संशोधन करना अनावश्यक है।