34. लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक - Page 634

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श्री जे.आर. कपूरः मैंने इसकी नोटिस कुछ समय पहले दी थी।

माननीय अध्यक्षः मैं किसी अतिरिक्त नोटिस का त्याग नहीं कर रहा हूं।

श्री जे.आर. कपूरः मैं सोच रहा हूं कि हो सकता है माननीय मंत्री जी इसे संभवतः स्वीकार कर लें।

डॉ. अम्बेडकरः यदि यह संविदा से संबंधित है तो इसे पहले ही संविदा अधिनियम में परिभाषित किया जा चुका है।

माननीय अध्यक्षः क्या सरकार संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार है?

डॉ. अम्बेडकरः मैं अब कोई संशोधन स्वीकार नहीं कर सकता।

श्री कॉमथः यदि मेरे संशोधन को अस्वीकार किया गया है तो इसका यह अर्थ है कि सरकार नियमों को सदन के समक्ष नहीं रखेगी?

डॉ. अम्बेडकरः मैं पहले ही कह चुका हूँ कि सरकार हमेशा सदन के समक्ष इसे रखने के लिए तैयार रहेगी।

श्री कॉमथः यदि यह आश्वासन दिया जाता है तो मैं अपने संशोधन पर जोर नहीं डालूंगा।

माननीय अध्यक्षः श्री कॉमथ सदन की इजाजत से अपना संशोधन वापस लेना चाहते हैं।

इजाजत से संशोधन वापस लिया गया।

माननीय अध्यक्षः अब मैं डॉ. अम्बेडकर का संशोधन प्रस्तुत करूंगा।

प्रश्न हैः

कि खंड 167 के उप-खंड (2) के भाग (ग) के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित करेंः

फ्(गग) ऐसी रीति जिसमें पीठासन अधिकारी, मतदान अधिकारी, मतदान अभिकर्ता या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा मत दिए गए हैं, जो किसी निर्वाचन-क्षेत्र का मतदाता होने के कारण ऐसे मतदान केंद्र पर अपनी ड्यूटी पर प्राधिकृत है या नियुक्त है जहां वह मत देने के लिए हकदार नहीं है_

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

माननीय अध्यक्षः प्रश्न हैः