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द्वारा नामांकन को अंतिम रूप दिया जाए और किसी नामांकन की उचित स्वीकृति या नामंजूरी के संबंध में कोई निर्वाचन अर्जी फाइल न की जाए।
डॉ. अम्बेडकरः मुझे बहुत दुःख है कि मुझे इस संशोधन का विरोध करना पड़ रहा है। जैसा कि मेरे मित्र पंडित भार्गव ने कहा कि सर्वप्रथम मैं ही पहला व्यक्ति था जिसने निर्वाचन को दो भागों में विभाजित विचार को गति प्रदान की थी उनमें एक नामांकन और दूसरा वास्तविक मतदान से संबंधित था। तथापि, प्रवर समिति ने इस मामले पर विचार किए बिना यह निष्कर्ष निकाला कि यह प्रक्रिया नहीं अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि ऐसे उम्मीदवार के लिए पर्याप्त समय नहीं होता है जिसके नामांकन की चुनौती इस आधार पर की गई है कि वह अपने पक्ष में विनिश्चय पाने के लिए कथित समय के भीतर साक्ष्य पेश न करने के कारण निरर्हित रहा है। मैं समझता हूं कि सदस्यों को याद होगा कि उस बैठक में ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त उपस्थित थे। उन्हें इस विषय पर चर्चा के लिए विशेष रूप से बुलाय गया था और उन्होंने स्वयं निर्वाचन आरंभ होने के पूर्व नामांकन को अंतिम रूप दिए जाने के इस विचार का विरोध किया था। इसके पश्चात् मैंने उनसे भी परामर्श लिया और उनकी भी यह पूर्ण राय थी कि निर्वाचन में काफी देर हो जाएगी यदि इस प्रक्रिया को अपनाया जाता है। अब हम सभी सहमत हैं कि निर्वाचन नवम्बर-दिसम्बर में होने चाहिएं, चाहे जो भी हो और क्योंकि इस कार्यक्रम को पूरा करने का दायित्व निर्वाचन आयोग पर है इसलिए इस विचार को प्रभावी बनाना मेरे लिए कठिन है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने उस धारा को स्वीकार कर लिया है। मुझे यह कहते हुए दुःख हो रहा है कि मैं संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता किन्तु मैं सदन को एक बात बताना चाहूंगा कि यह विधि जो हम बना रहे हैं, हमेशा के लिए विधि नहीं हैं। यदि हम वर्तमान निर्वाचन के लिए इस विशिष्ट संशोधन को अंगीकार करने में समर्थ नहीं है, तो बाद के प्रक्रम पर इस अधिनियम में इसे सम्मिलित करने से रोकने वाली ऐसी कोई बात नहीं है, ताकि अगले निर्वाचन में नई प्रक्रिया अपनाई जा सके। इस विधि को संशोधित, परिवर्धित ओर परिवर्तित किया जा सकता है। एक क्षण के लिए इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि हम सभी नवम्बर-दिसम्बर में निर्वाचन कराने के लिए कृतसंकल्प हैं, ऐसा कोई उपाय जिसका विलम्बकारी प्रभाव हो, सम्मिलित करना बिल्कुल असंभव लगता है।
माननीय अध्यक्षः तो क्या मैं संशोधन सदन के समक्ष रखूं?
पंडित ठाकुर दास भार्गवः मेरा संशोधन सदन के समक्ष रखा जाए।
माननीय अध्यक्षः संशोधन पेश किया गया।
प्रस्ताव को अंगीकार किया गया।