10. स्थगन के लिए प्रस्ताव हैदराबाद के मीर लायक अली का अभिरक्षा से निकल भागना - Page 69

54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कि राज्य का प्रशासन चलाने के लिए गृह मंत्रालय द्वारा निज़ाम को कुछ अधिकारी उधार दिए गए हैं, हैदराबाद राज्य की प्रकृति को बिलकुल उसी आधार पर होने से नहीं बदल सकता जो भाग ‘ख’ के अन्य राज्यों का है। और यह भाग ‘क’ के राज्यों में समतुल्य होने जैसा ही है। मुझे बाद में एक लघु विशेषक के रूप में कुछ बताना होगा किंतु मैं यह कहना चाहता हूँ कि मात्र यह तथ्य कि अधिकारी उधार दिए गए हैं, संविधान के क्षेत्र के भीतर हैदराबाद राज्य की प्रस्थिति और प्रकृति या स्थिति को परिवर्तित नहीं करता है।

अब, यह साधारण प्रतिपादना है कि भाग ‘क’ के राज्य और भाग ‘ख’ के राज्य, कार्यपालिका प्राधिकार के मामले में, विधायी प्राधिकार के मामले में और अपने कब्जे में विधायी तथा कार्यपालिका प्राधिकार प्रशासित करने की पद्धति और रीति के संबंध में केन्द्र से आजाद और स्वतंत्र है। यह साधारण प्रतिपादना है। अब हमें जिस मुद्दे पर विचार करना है, वह अनुच्छेद 371 में अंतर्विष्ट उपबंध है, और प्रश्न यह है कि क्या इस अनुच्छेद का उपबंध भाग ‘ख’ के राज्यों की स्थिति में कोई परिवर्तन करता है? क्योंकि, जैसा कि सभी जानते हैं, अनुच्छेद 371 केवल भाग ‘ख’ के राज्यों को लागू होता है और भाग ‘क’ के राज्यों को लागू नहीं होता। कल चर्चा के दौरान मैंने यह देखा कि एक माननीय सदस्य ने कहा था कि केन्द्रीय सरकार को, उपबंधों की स्थिति के अलावा, राज्य सरकारों को कोई निदेश देने का प्राधिकार प्राप्त नहीं है, जिससे मुझे यह लगा कि उनके विचार में अनुच्छेद 371 राज्यों के मंत्रिमंडल या भारत सरकार के लिए भाग ‘ख’ के राज्यों को निदेश जारी करने का आधार नहीं बन सकता। मेरा ससम्मान निवेदन है कि मैं इस स्थिति को स्वीकार नहीं कर सकता। मामला पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए, केन्द्र के पास संविधान के अन्तर्गत चार अलग-अलग अनुच्छेदों के अधीन विभिन्न राज्यों को 352 निर्देश जारी करने की शक्ति है। पहला आपात् अनुच्छेद नाम से ज्ञात अनुच्छेद है जो युद्ध या आंतरिक आक्रमण या इसी प्रकार की अन्य बातों से उत्पन्न होती हैं। राज्यों को निदेश जारी करने के लिए केन्द्र को अनुज्ञात करने वाला दूसरा अनुच्छेद 360 है जो वित्तीय आपात् विषयक है_ जब राष्ट्रपति का समाधान हो जाए कि राज्य की साख संकट में है। तो वह वित्तीय आपात् की स्थिति की घोषणा कर सकता है और उस अनुच्छेद के अधीन वह राज्यों को कतिपय निदेश जारी कर सकता है। तीसरा अनुच्छेद 356 है जो विफलता अनुच्छेद के नाम से जाना जाता है। जब राष्ट्रपति यह पाता है कि किसी विशिष्ट राज्य में संविधान का पालन उसमें अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार नहीं किया जा रहा है तो ऐसी स्थिति में भी, राष्ट्रपति यह देखने के लिए कतिपय निदेश जारी करता है कि संविधान का पालन इसमें अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार किया जाए।

अब अंतिम अनुच्छेद 371 आता है, जो एक पर्यवेक्षण अनुच्छेद है। यह समझा जाना चाहिए कि अनुच्छेद 352, 360 और 356 सामान्य रूप में आपात् अनुच्छेद हैं, अर्थात् राज्यों को निदेश देने के लिए उनका अवलंब केवल कतिपय परिस्थितियाँ उत्पन्न होने पर और राष्ट्रपति का समाधान हो जाने पर कि वैसी परिस्थतियां उत्पन्न हुई हैं, लिया जा सकता है।