10. स्थगन के लिए प्रस्ताव हैदराबाद के मीर लायक अली का अभिरक्षा से निकल भागना - Page 70

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पंडित कुंज़रु (उत्तर प्रदेश)ः क्या मैं माननीय विधि मंत्री से जान सकता हूँ कि क्या उन्होंने ये विचार अनुच्छेद 371 के लिए भी व्यक्त किए हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं, मैं इसे अलग से ले रहा हूँ। मैं एक ओर अनुच्छेद 371 में अंतर्विष्ट उपबंधों तथा दूसरी ओर अनुच्छेद 352, 360 और 356 में अंतर्विष्ट उपबंधों के मध्य अंतर करने का प्रयास कर रहा हूँ। जैसा कि मैंने कहा है, ये बाद वाले अनुच्छेद आपात् अनुच्छेद हैं, ये ऐसे अनुच्छेद नहीं हैं। जो सामान्य समय में सामान्य प्रशासन से संबंधित हों। उनका अवलंब परिस्थितियों द्वारा न्यायोचित ठहराया जाना चाहिए। उनके संबंध में दूसरी बात यह है कि वे भाग ‘ख’ के राज्यों को उसी सीमा तक उसी मात्रा में और उसी रीति में लागू होते हैं जैसे कि भाग ‘क’ के राज्यों के लिए होते हैं परन्तु यह तब जबकि आपात् उत्पन्न हो चुका हो।

अनुच्छेद 371 की स्थिति भिन्न है। इसमें आपात् अपेक्षित नहीं है। इसे सामान्य समय में प्रयुक्त किया जा सकता है। अन्तर की यह एक विशेषता है। अन्तर की दूसरी विशेषता यह है कि यह केवल भाग ‘ख’ के राज्यों को लागू होता है। यह भाग ‘क’ के राज्यों को लागू नहीं होता। अतः मेरे विचार से यह कहना सही नहीं है कि भाग ‘ख’ के राज्यों को निदेश देने के लिए केन्द्रीय सरकार को या तो अनुच्छेद 352, जो एक आपात् अनुच्छेद है या अनुच्छेद 360 या अनुच्छेद 356 का उपयोग करना चाहिए। (पंडित कुंजरुः साधु, साधु)। इन तीन अनुच्छेदों से अलग, केन्द्र को अनुच्छेद 371 के अधीन भाग ‘ख’ के राज्यों को निदेश जारी करने का अधिकार प्राप्त है।

पंडित बाल कृष्ण शर्मा (उत्तर प्रदेश) ः और यह केवल संक्रमणकालीन है।

डॉ. अम्बेडकरः यह अलग विषय है। संक्रमण समाप्त नहीं हुआ है। अनुच्छेद चालू है और हमें इसे इसी रूप में लेना चाहिए। अतः मेरी राय में, अनुच्छेद 371 केन्द्र को भाग ‘ख’ के राज्यों को निदेश जारी करने की शक्ति को देना ही है भले ही आपात् न हो। यह एक ऐसा अनुच्छेद है जिसे सामान्य समय में प्रयोग करना होता है।

अब, श्रीमन्, आपके द्वारा पूछे गए प्रश्न को, यदि आप आज्ञा दें तो मैं अन्त में लेना चाहूँगा। जहाँ तक अनुच्छेद 371 का संबंध है और जहाँ तक निदेश जारी किया गया हैµमैं जान बूझकर ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहा हूँµजहाँ तक अनुच्छेद 371 का संबंध है और जहां तक इसे राज्य सरकार को निदेश जारी करने के प्रयोजन के लिए प्रयोग किया गया है, मुझे यह प्रतीत होता है कि इस सदन द्वारा उस विषय पर चर्चा करने के लिए एक संभव आधार है। इस विषय में यही मेरी राय है।

अब मैं..........लेना चाहता हूँ।

माननीय अध्यक्षः क्या इस अवस्था में मुझे एक मुद्दे पर स्पष्टीकरण मिलेगा, क्या निदेश देने में असफलता..........?