10. स्थगन के लिए प्रस्ताव हैदराबाद के मीर लायक अली का अभिरक्षा से निकल भागना - Page 73

58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

फ्फ़ेडरेशन का कार्यकारी प्राधिकार, किसी प्रांत को ऐसे निदेश देने के लिए विस्तारित होगा जो उस प्रयोजन के लिए फ़ेडरल सरकार को आवश्यक प्रतीत हों।य्

यह आगे कहता हैः

फ्फ़ेडरेशन का कार्यकारी प्राधिकार, प़ेQडरल विधानमंडल आदि के किसी अधिनियम को किसी प्रांत को दिए गए निदेशों के अधीन क्रियान्वित करने के लिए भी विस्तारित होगा।य्

जैसाकि मैंने कहा है, धारा 126, प्रांतों को निदेश देने की शक्ति से संबंधित है। इसी प्रकार अनुच्छेद 371 भी निदेश देने के लिए केन्द्रीय सरकारा को शक्ति देता है। जैसाकि मेरे पूर्व सर नृपेन्द्र सरकार द्वारा निर्वचन किया गया था, पूर्व में हाउस आफ़ कॉमन्स में की गई चर्चा और स्पष्टीकरण के आधार पर वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि ऐसे विषयों पर जो कि धारा 126 की सीमा के अंतर्गत आता हो, इस सदन में चर्चा की जा सकती है। अतः मेरा निवेदन है कि उनकी राय सही है।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारी (मद्रास)ः श्रीमन्, क्या मैं माननीय विधि मंत्री को यह सुझाव दे सकता हूँ कि वे भारत शासन अधिनियम की धारा 126 की तुलना संविधान में अनुच्छेद 257/(1) और अनुच्छेद 73(1) के परन्तुक से करते हुए अपनी राय दें।

डॉ. अम्बेडकरः मैंने उन धाराओं पर विचार नहीं किया है। यदि यह मुद्दा किसी और समय उठाया जाएगा तो मैं स्पष्ट करने के लिए तैयार रहूँगा। इस समय, यह उस विषय से संगत प्रतीत नहीं होता, जिस पर हम चर्चा कर रहे हैं।

पंडित कुंजरुः क्या माननीय विधि मंत्री अनुच्छेद 371 पढ़कर हमें यह बताएंगे कि क्या इसके अंतर्गत भारत सरकार द्वारा राज्य सरकारों को केवल केन्द्रीय (फ़ेडरल) विषयों के संबंध में आदेश जारी किए जा सकते हैं अथवा राज्य सूची में सम्मिलित विषयों के संबंध में भी।

डॉ. अम्बेडकरः वह पूर्णतया स्पष्ट है कि अनुच्छेद 371 राज्य विधानमंडल और राज्य कार्यपालिका के क्षेत्राधिकार में आने वाले विषयों से संबंधित विदेशों के मुद्दे पर ध्यान देता है, यह वास्तव में, राज्यों के प्रशासन के संबंध में ही है कि अनुच्छेद 371 का प्रारुपण किया गया है। इस बिंदु पर मेरे मन में कोई संदेह नहीं है। अब श्रीमन्........।

पंडित कुंज़रुः क्या मैं माननीय विधि मंत्री से यह जान सकता हूँ कि फिर वे कैसे अनुच्छेद 371 को भारत शासन अधिनियम की धारा 126 के, जो फ़ेडरल सूची में सम्मिलित विषयों के संबंध में भारत सरकार के कार्यपालिका प्राधिकार को सीमित करती है, सदृश समझते हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे ख़्याल में मेरे माननीय मित्र मुझे समझ नहीं पाए। मुद्दा यह है मैं इसे और स्पष्ट रूप में रखता हूँ। जब एक सरकार अन्य सरकार