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पंडित कुंजरुः मेरे मित्र ने यह निष्कर्ष कैसे निकाला?
डॉ. अम्बेडकरः यह मैंने पढ़कर निकाला है। जैसाकि मैं कह चुका हूँ, मेरे मित्र इसे भिन्न रूप में पढ़ सकते हैं_ मैं जानता हूँ और यदि मैं यह कहूँ कि ऐसे व्यक्ति जो सावधान होने की तुलना में अधिक उत्साही हैं, संभवतः इस अनुच्छेद को अधिक विस्तारित अर्थ देंगे। परन्तु यदि इसे इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह तथ्य कि संविधान ने राज्यों में अपने कार्यों को स्वयं प्रशासित करने के अधिकार निहित किए हैं और केवल भाग ख के राज्यों की दशा में कुछ विषयों पर कतिपय अवसरों पर निदेश देने की कतिपय अवशिष्ट शक्तियाँ दी हैं ओर यह शक्ति, जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूँ, अनुच्छेद 371 के अधीन बहुत ही सीमित रूप में प्रयोग की जा सकती है। अतः मेरा निवेदन है कि, यद्यपि मैंने अनुच्छेद 371 पढ़ा है, और में इस निष्कर्ष को स्वीकार किए बिना नहीं कर सकता कि यह भाग ख के राज्यों के प्रशासन के संबंध में किसी मामले पर चर्चा की संभावना को स्वीकार करता है, फिर भी वह बहुत सीमित प्रकृति की होनी चाहिए। मुझे बस इतना ही कहना है।
परिवहन और रेल मंत्री (श्री गोपालस्वामी)ः मैं केवल एक विशिष्ट मुद्दे का हवाला देना चाहता हूँ। यदि आप अनुच्छेद 371 के लागू होने पर एक साधारण विनिण् ार्य देना चाहते हैं तो उस अनुच्छेद पर आधारित इसके निर्वचन और स्थगन प्रस्ताव की ग्राह्यता पर मैं आपसे यह अनुरोध करना चाहूँगा कि अपने विनिर्णय को उस समय तक स्थगित कर दें जब तक मेरी ही तरह अन्य सदस्य आपके समक्ष कुछ बातें रखे। किंतु यदि आप इस प्रस्ताव को उसी छोटे आधार पर, जिस पर माननीय विधि मंत्री ने अपना भाषण समाप्त किया, रद्द करने जा रहे हैं तो मैं आपके समक्ष ये मुद्दे रखकर सदन का समय नष्ट नहीं करना चाहता।
माननीय अध्यक्षः मैं उन्हें बताऊंगा कि मेरे मन में क्या चल रहा है। मैं किसी विनिश्चय में जल्दबाजी नहीं करना चाहता। मैंने माननीय विधि मंत्री को सुना है, मैंने उनके दृष्टिकोण को सुना है, और यदि अन्य सदस्य इसके पूर्ण रूपेण संविधानिक पहलुओं पर कुछ कहने के उत्सुक हों, इसके गुणागुण पर ध्यान दिए बिना, तो मैं उन्हें सुनने के लिए तैयार हूँ, किन्तु वह चर्चा बहुत कम समय की होगी। मैंने अभी तक अपना मन नहीं बनाया है। कि............।
डॉ टेक चन्द (पंजाब)ः क्या हम यह चर्चा आज करेंगे या किसी अन्य दिन? इस प्रश्न से बहुत महत्वपूर्ण.......
माननीय अध्यक्षः अभी मेरी बात पूरी नहीं हुई है। माननीय सदस्य कृपया पहले मुझे अपनी बात पूरी करने दें तभी वे पाएँगे कि मैं पूरी तरह सहमत नहीं हूँ एवं मैं वही करने जा रहा हूँ जो वे करवाना चाहते हैं। जिस मुद्दे पर मैं आ रहा था वह यही