62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है। मैं, स्वयं को केवल वर्तमान मामले के तथ्यों तक सीमित कर रहा हूँ और मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या मैंने माननीय विधि मंत्री को सही समझा है। उन्होंने परिधि के बारे में व्यापक मुद्दों पर अपने विचार दिए हैं और, जैसा कि उन्होंने कहा है ऐसे अवसर आ सकते हैं जब केन्द्र इस शक्ति का प्रयोग करे, किन्तु क्या मैं उन्हें इस प्रकार समझने में स्पष्ट हूँ कि यदि यह माना जाए कि केन्द्र द्वारा कोई निदेश नहीं दिए गए हैं या कोई नियंत्रण प्रयोग नहीं किया गया है तो वर्तमान प्रस्ताव उपयुक्त नहीं होगा। क्या उनका निष्कर्ष यही है?
डॉ अम्बेडकरः मेरा विचार यही है।
माननीय अध्यक्षः दूसरी स्थिति जिसे मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ फ्साधारण नियंत्रणय् शब्दों के बारे में थी। उन्होंने कहा था कि फ्साधारणय् शब्द से संपूर्ण प्रशासन पर नियंत्रण अभिप्रेत है।
डॉ. अम्बेडकरः और विस्तृत नियंत्रण नहीं, दिन-प्रति-दिन के प्रशासन पर नहीं।
माननीय अध्यक्षः मैं यही स्पष्ट करना चाहता था। केन्द्र द्वारा निर्धारित साधारण नीति के अधीन रहते हुए राज्यों को पूर्ण स्वायत्तता प्राप्त होगी।
डॉ. अम्बेडकरः किंतु यह तथ्य भी कि यदि भारत सरकार का समाधान हो जाए कि निर्देशों का पालन नहीं किया गया है तो अन्य उपबंध लागू किए जाएंगे।
माननीय अध्यक्षः यह एक अलग विषय है। किंतु इस सदन में तब तक चर्चा के लिए कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता जब तक कि अनुच्छेद 371 के अधीन शक्ति का प्रयोग केन्द्र द्वारा न किया जाए।