63
(11)
संसद (निरर्हता निवारण) विधेयक
ऽमाननीय विधि मंत्री डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे पेश करने की इजाजत दी जाएः
फ्कि संविधान के अनुच्छेद 102 के अधीन लाभ के कतिपथ पदों के संबंध में उपबंध करने के विधेयक पर विचार किया जाए।य्
मरे विचार में मेरे लिए यह आवश्यक नहीं है कि मैं इस विधेयक के उपबंधों को समझने में माननीय सदस्यों को समर्थ बनाने के लिए कोई लम्बा बयान दूं। यह बहुत छोटा विधेयक है। इसमें मात्र एक खंड है। किन्तु माननीय सदस्यों को ऐसी स्थिति में रखने के लिए कि वे समझ सकें कि क्या हो रहा है, मैं यह कहना चाहता हूँ कि संविधान का अनुच्छेद 102 यह उपबंध करता है कि कतिपय व्यक्ति संसद के सदस्य होने के लिए निरहित होंगे। उनमें से एक निरर्हता सरकार के अधीन लाभ का कोई पद धारण करने से संबंधित है। जहाँ तक मंत्रियों का संबंध है वे उस अनुच्छेद के खंड (2) द्वारा अनुच्छेद 102 के प्रवर्तन से अपवर्जित हैं। तथापि, भारत सरकार में केवल मंत्री ही नहीं होते बल्कि मंत्रियों के अन्य वर्ग जैसे उपमंत्री और राज्य मंत्री भी होते हैं। ये पद संविधान के प्रवर्तित होने से पूर्व सृजित किए गए थे। उनके धारक पद धारण करने के हकदार होने के साथ संसद के सदस्य भी थे क्योंकि 15 अगस्त, 1947 और 26 जनवरी, 1950 के मध्य की अवधि के दौरान, तथा अनुकूलित भारत शासन अधिनियम, 1935 में ऐसा कोई उपबंध अंतर्विष्ट नहीं था, जिसका मैंने निर्देश किया है, अर्थात् लाभ का कोई पद धारण करना एक निरर्हता होगी। वास्तव में, अब अनुच्छेद 102 में अंतर्विष्ट उपबंध के कारण स्थिति में परिवर्तन आया है जिससे 26 जनवरी, 1950 से राज्य मंत्री और उप मंत्री संसद में बैठने से निरर्हित हो जाते। इस कठिनाई को दूर करने और निरर्हता को हटाने के लिए, जो अन्यथा उपगत हो जाती, सरकार ने उन्हें संसद में बैठने के लिए अनुज्ञात करने वाला एक अध्यादेश जारी किया था। जैसाकि माननीय सदस्य जानते हैं, नए संविधान के अधीन अध्यादेश का जीवन बहुत छोटा अर्थात् संसद अगले के अधिवेशन से छह सप्ताह होता है। इस विशिष्ट मामले में संसद का अधिवेशन 28 जनवरी से प्रारम्भ हुआ और इसीलिए अध्यादेश इस मास की 12 तारीख को समाप्त हो जाएगा। यह आवश्यक है कि अध्यादेश का विधिक प्रवर्तन समाप्त होने के पूर्व यह विधेयक पारित हो जाए। विधेयक का उद्देश्य ईप्सा अध्यादेश की धारा-2 के खंड (क) को सम्मिलित करना है जो उप मंत्रियों और राज्य मंत्रियों से संबंधित है। वर्तमान विधेयक मूल अध्यादेश की धारा 2 के खंड (ख), जिसमें अशंकालिक पदों के लिए उपबंध
ऽसं. वा., खंड 2, भाग II, 9 मार्च, 1950, पृष्ठ 1330