64 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
किया गया था, को प्रभावी बनाने का प्रस्ताव नहीं करता है। इसके बजाय, विधेयक में दो और पदों, अर्थात् संसदीय सचिवों और संसदीय अवर सचिवों को सम्मिलित करने का प्रस्ताव किया गया है। यह महसूस किया गया है कि यद्यपि ये पद अब विद्यमान नहीं हैं और सृजित नहीं किए गए हैं, किन्तु इसकी प्रबल संभावना है कि भारत सरकार के लिए इन्हें सृजित करना आवश्यक हो जाए। अतः यह महसूस किया गया कि इन पदों को भी सम्मिलित करने के लिए विधेयक की परिधि का विस्तार करना बेहतर होगा। मैं नहीं समझता कि विधेयक के समर्थन के लिए किसी और तर्क की आवश्यकता है और आशा करता हूँ कि सदन इसे स्वीकार करेगा।
माननीय उपाध्यक्षः प्रस्ताव पेश किया गया।
ऽडॉ. अम्बेडकरः मैं यह समझना चाहूँगा कि क्या मेरे माननीय मित्र विधेयक में किए गए इस प्रस्ताव से सहमत हैं कि ये दो पद सृजित किए जाएं और सृजित किए जाने पर, इन्हें संविधान के अनुच्छेद 102 में अधिनियमित उपबंध से छूट दे दी जाए। हमें इस बात को बहुत स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए ओर यदि मेरे माननीय मित्र पूरा आधा घंटा ले लेगें तो आगे बढ़ने का कोई लाभ नहीं है।
श्री त्यागीः यदि वे थक गए हैं, तो वे घर जा सकते हैं।
माननीय उपाध्यक्षः मैं सहमत हूँ कि कितना भी समय लिया जा सकता है किंतु जहाँ तक इस विधेयक का संबंध है, इसमें बहुत छोटा-सा मुद्दा है।
ऽऽडॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं मात्र इतना समझना चाहता था कि वास्तव में, वह क्या मुद्दा है जो मेरे माननीय मित्र उठाना चाहते हैं और यदि वे पूरा आधा घंटा लेना चाहते हैं, तो यही बेहतर होगा कि कल प्रारम्भ करें और विधेयक पर कार्यवाही पूरी करें।
श्री त्यागीः जब लोग शीघ्र समझने की स्थिति में नहीं होते, तब उन्हें समझाने में मुझे समय लगता है।
पंडित कुंज़रु (उत्तर प्रदेश)ः क्या सरकार का आग्रह है कि विधेयक आज ही पारित किया जाए?
डॉ. अम्बेडकरः मैं ऐसा नहीं कर रहा हूँ। यह माननीय उपाध्यक्ष ही हैं जो कहते हैं, फ्आइए, हम आधा घंटा लें।य्
ऽसं. वि., खंड 2, भाग II, 9 मार्च, 1950, पृष्ठ 1334
ऽऽसं. स. (वि.) वा., खंड II, 9 मार्च, 1950, पृष्ठ 1334