11. संसद (निरर्हता निवारण) विधेयक - Page 81

66 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बुद्धिमानी का कार्य किया है। अतः जहाँ तक विधेयक के सटीक उपबंधों का संबंध है, मेरा विचार है कि एक सावधान सदन को उनका समर्थन करना चाहिए। मैं इस बिंदु पर कुछ और नहीं कहना चाहता।

दूसरे प्रश्न के संबंध में, इस तथ्य के कारण सदन के सदस्यों द्वारा उपगत निरर्हता कि वे इस प्रकार का कोई पद धारण कर रहे हैं जो मंत्री पदों से बाहर का है........।

श्री सिधवाः मैंने समितियों का उल्लेख किया था।

डॉ. अम्बेडकरः इसीलिए मैंने मंत्रीतर पद कहा था। मैं सही विधिक पद का प्रयोग कर रहा हूँ। मेरे विचार में इस प्रश्न पर विचार किया जाना चाहिए। संसद के उठ जाने के बाद यह प्रश्न कल उठाया गया था किन्तु दुर्भाग्यवश जब मैं अपने कक्ष में गया तो मैंने देखा कि सभी पुस्तकालय बंद हो चुके थे और मुझे आवश्यक निर्देश पुस्तकें, जिनका मैं अध्ययन करना चाहता था, नहीं मिल सकीं क्योंकि मैं जानता था कि यह मामला सदन में उठाया जाएगा और मैंने सोचा था कि मुझे कुछ ऐसा उत्तर देने के लिए तैयार रहना चाहिये जो मैं इस परिस्थितियों में दे सकता था। मैंने इस विषय पर अपने मस्तिष्क का उपयोग किया और मैं केवल इतना कह सकता हूँ कि मैं एक ऐसे अनंतिम निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ जिसे मैं सदन के समक्ष प्रस्तुत करना चाहता हूँ।

प्रथमतः मैं ऐसी आशंका को दूर करना चाहता हूँ जो मेरे मित्र श्री सिधवा द्वारा उठाई गई है कि उनका कोई शत्रु कठिनाई उत्पन्न कर सकता है। मैं आशा करता हूँ कि उनका कोई शत्रु नहीं। मेरा विचार है कि उन्हें अजातशत्रु के रूप में वर्णित किया जा सकता है। फिर भी, हमारे संविधान ने ऐसे प्रचुर उपबंध किए हैं कि निरर्हता से संबंधित इस प्रकार के मामले न्यायालय में न जाएँ। अनुच्छेद 103 द्वारा हमने यह विनिश्चित करने की शक्ति राष्ट्रपति पर छोड़ दी है कि क्या कोई लाभ का पद स्वीकार करने के कारण किसी विशिष्ट संसद सदस्य ने निरर्हता उपगत की है या नहीं। राष्ट्रपति अंतिम प्राधिकारी हैं। अनुच्छेद 103 के अधीन राष्ट्रपति को बहुत ही सोच-समझ कर और बहुत ही बुद्धिमानी के साथ परिषद की सलाह पर कार्य करने से मुक्त रखा गया है, क्योंकि यह महसूस किया गया था कि मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को हितबद्ध सलाह दे सकती है। अतः लाभ का पद धारित करने से उत्पन्न निरर्हता से संबंधित इस विशिष्ट मामले में राष्ट्रपति से निर्वाचन आयुक्त की सलाह पर कार्य करने की अपेक्षा की जाती है।

श्री कामथः अनुच्छेद 103 के खंड (2) के बारे में क्या है?

डॉ. अम्बेडकरः मैं इसपर आ रहा हूँ। अनुच्छेद 103, एक प्रकार से अनुच्छेद 74 का अपवाद है। अनुच्छेद 74 के अधीन राष्ट्रपति से यह अपेक्षित है कि वह विधायन और प्रशासन से संबंधित सभी मामलों में मंत्रियों की सलाह स्वीकार करें। इसके संबंध में एक अपवाद रखा गया है, और जैसाकि मैंने कहा है, सोच-समझ कर एक अपवाद