11. संसद (निरर्हता निवारण) विधेयक - Page 82

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रखा गया है, जिससे कि राष्ट्रपति इस प्रश्न का विनिश्चय करते समय किसी भी तरह के राजनीतिक असर से प्रभावित न हों।

श्री कामथः वह कौन-सा निकाय है जो इस समय निर्वाचन आयुक्त की जगह कार्य करता है?

डॉ. अम्बेडकरः इस तुरन्त निर्वाचन आयुक्त का पद कठित कर रहे हैं और इसमें कोई संदेह नहीं है कि ऐसा कोई भी प्रश्न राष्ट्रपति को प्रस्तुत किए जाने के पहले ही मामले पर कार्यवाही करने के लिए निर्वाचन आयुक्त मौजूद होगा।

श्री कामथः इस विशिष्ट मामले में, अनुच्छेद 103 के खंड (2) का, जो आज्ञापक है, पालन नहीं किया गया है।

खंड (2) का कहना हैः

फ्ऐसे किसी प्रश्न पर कोई विनिश्चय करने के पहले, राष्ट्रति निर्वाचन आयोग की राय लेगा और ऐसी राय के अनुसार कार्य करेगा।य्

माननीय उपाध्यक्षः ऐसा कोई प्रश्न राष्ट्रपति को नहीं भेजा गया है।

श्री त्यागीः खड़े हो जाते हैं.....

डॉ. अम्बेडकरः श्रीमन्, मैं इन सभी छोटे-छोटे प्रश्नों का, जो इस प्रश्न से संबंधित नहीं हैं, उत्तर नहीं दे सकता। मेरे मित्र श्री सिधवा ने सदन को यह सुझाव दिया था कि जनता में से कोई भी व्यक्ति उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में जाकर विनिश्चय प्राप्त कर सकता है। संविधान के अधीन यह प्रक्रिया वर्जित है। यह मामला पूर्ण रूप से राष्ट्रपति पर छोड़ दिया गया है।

अब मैं दूसरे प्रश्न पर आता हूँ जो श्री सिधवा ने बहुत ही स्पष्ट रूप से उठाया था कि उन संसद सदस्यों का क्या होगा जिन्हें विभिन्न समितियों में नियुक्त किया गया है। क्या वे निरर्हित हो जाएँगे अथवा वे निरर्हित नहीं होंगे? अब, यहाँ मेरे समक्ष विभिन्न प्रकार की समितियों का विश्लेषण है जिनमें सदस्यों को सेवा करने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है जहाँ उन्हें किसी रूप में पारिश्रमिक, या शुल्क या कुछ प्राप्त हो सकता है। प्रथमतः यह सदस्यता, संसद के किसी संकल्प द्वारा या संसद द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा गठित किसी समिति या आयोग में होती है, उदाहरणार्थ लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति, विभिन्न मंत्रालयों से सम्बद्ध स्थायी समितियाँ आदि में। अन्य और भी समितियाँ हो सकती हैं किंतु तात्त्विक बिंदु यह है कि समितियों की नियुक्ति संसद के किसी संकल्प द्वारा या संसद द्वारा बनाए गए नियमों के अधीन की जाती है। बेशक, मैं किसी प्रकार की मतान्धता के बिना बोल रहा हूँ किन्तु मैं किसी प्रकार का संदेह महसूस नहीं करता हूँ कि ऐसी किसी समिति की सदस्यता से कोई निरर्हता मात्र इस कारण से