11. संसद (निरर्हता निवारण) विधेयक - Page 83

68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

होगी कि यह नियुक्ति, संसद द्वारा या तो किसी विशिष्ट समिति से संबंधित नियमों द्वारा या समितियों के गठन के लिए साधारणतया बनाए गए नियमों द्वारा की गई है।

सदस्यता का दूसरा वर्ग संसद के अधिनियम द्वारा गठित सभी नियमित निकायों से संबंधित है, उदाहरण के लिए जहाँ अधिनियम या तो इसके सदस्यों में से या बाहरी व्यक्तियों में से संसद द्वारा सदस्यों के निर्वाचन के लिए उपबंध करता है, जैसे भारतीय तिलहन समिति, भारतीय नर्सिंग परिषद, कर्मचारी राज्य बीमा निगम या केन्द्रीय रेशम बोर्ड। उसी वर्ग के अधीन ऐसे मामले भी हैं जहाँ ऐसे सदस्यों की नियुक्ति केन्द्रीय सरकार द्वारा की जाती है, उदाहरण के लिए, कोयला खान भरण बोर्ड, दिल्ली परिवहन प्राधिकरण इत्यादि। मैं यहाँ अपने मात्र प्रारम्भिक निष्कर्ष व्यक्त कर रहा हूँ और मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि प्रथम वर्ग के अंतर्गत जहाँ संसद कतिपय कानूनी निकायों के निर्वाचन के लिए उपबंध करती है जिन्हें सरकार द्वारा की गई नियुक्ति नहीं समझा जा सकता और इसीलिए इस तरह की सदस्यता से मेरी राय में, किसी तरह की निरर्हता नहीं होगी। किंतु दूसरे वर्ग के संबंध में, जहाँ ऐसे सदस्यों की नियुक्ति केन्द्रीय सरकार द्वारा की जाती है, मुझे कुछ महसूस होता है। मेरा विचार है कि इसमें संभवतः कुछ निरर्हता मात्र इस कारण हो सकती है कि यद्यपि निगम, जिनमें नियुक्तियाँ की गई हैं, कानूनी निकाय हैं, जिन्हें संसद द्वारा अधिनियमित विधि द्वारा सृजित किया गया है, फिर भी नियुक्ति तो सरकार द्वारा की जाती हैं। अतः यह विनिश्चित करते समय कि क्या संभावित परिणाम निरर्हता नहीं हो सकता, इस एक पहलू पर विचार करना होगा। एक अन्य अंतर भी किया जा सकता है, अर्थात्, यह कि कोयला खान सुरक्षा (भरण) अधिनियम के अधीन किसी कानूनी निकाय में या दिल्ली परिवहन प्राधिकरण में सरकार द्वारा नियुक्त किसी संसद सदस्य को भुगतान उस विशिष्ट प्राधिकरण की निधियों से किया जाता है न कि सरकारी निधियों से, मुझे संदेह है कि क्या अन्तर यह एक संभव आधार हो सकेगा अथवा नहीं। व्यक्तिगत रूप से मेरा विचार है कि इससे निरर्हता होगी, क्योंकि संसद सदस्य को नियुक्ति देकर भुगतान कहीं और से करना कानून के साथ कपट समझा जाएगा। मेरा विचार है? यह एक ऐसा मामला है जिसे अपवर्जित किया जाना चाहिए.......।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारी (मद्रास)ः इसे उस प्रवर्ग में नहीं माना जाता है।

डॉ. अम्बेडकरः मैं नहीं जानता। मेरे मित्र श्री टी.टी. कृष्णमाचारी, मुझे यह कहने की अनुमति देंगे कि मैं कल रात बिल्कुल भी नहीं सो सकता था। यह विषय इतना जटिल है कि मैं हैल्सबरी और अन्य पुस्तकें पढ़ता रहा। मेरे पास केवल एनसन की एक मात्र पुस्तक है जो कुछ मार्गदर्शन कर सकती है और उसे मैं आप तक पहुँचा दूँगा। यह 1922 में प्रकाशित हुई थी और संभवतः इससे इस विषय में सर्वोत्तम सहायता मिलती है। मेरे माननीय मित्र को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा और मैं यहाँ अपना मात्र प्रारम्भिक निष्कर्ष ही दे रहा हूँ।