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श्री कामथः माननीय मंत्री को आज रात अच्छी नींद आएगी।
श्रीमती दुर्गाबाई (मद्रास)ः संसद के एक अधिनियम के अधीन गठित अखिल भारतीय नर्सिंग परिषद् के संबंध में क्या स्थिति है?
डॉ. अम्बेडकरः संभवतः इसमें कोई निरर्हता नहीं होगी। अब मैं, संसद के किसी अधिनियम के अधीन गठित या किसी कानूनी निगम द्वारा नियुक्त सलाहकार परिषदों अथवा समितियों की सदस्यता पर आता हूँ। उदाहरण के लिए, हम दामोदर घाटी निगम का मामला लेते हैं। जैसाकि मैंने कहा था, मैं इसके बारे में भी निश्चित नहीं हूँ। (अवरोध) मैं किसी विशिष्ट मुवक्किल को सलाह नहीं दे रहा हूँ। मुझे यह कहते हुए बहुत दुःख हो रहा है, मैं एक सामान्य बात कह रहा हूँ। यदि माननीय महिला नर्सिंग परिषद में हितबद्ध हैं, तो उनके लिए किसी वकील के पास जाकर परामर्श लेना बेहतर होगा।
श्री सिधवाः यह उचित नहीं है।
श्रीमती दुर्गाबाईः अपने बताया था कि कोयला खान सुरक्षा (भरण) अधिनियम निर्रहता के अंतर्गत नहीं आता है......।
डॉ. अम्बेडकरः मैंने रात भर इसका अध्ययन किया और पता लगाया कि उपबंध क्या है?
अब मैं, संकल्प या आदेश द्वारा विशिष्ट प्रयोजनों के लिए सरकार द्वारा गठित समितियों, आयोगों या परिषदों या ऐसे ही अन्य निकायों की सदस्यता पर आता हूँ। उदाहरण के लिए, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शासी निकाय की सदस्यता, राजकोषीय आयोग की सदस्यता, सरकारी व्यापार जाँच समिति की सदस्यता (अवरोध) में कुछ छिपाना नहीं चाहताµविशेष भर्ती बोर्ड की सदस्यता, संयुक्त राष्ट्र संघ या किसी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन या संगम में प्रतिनिधि अथवा प्रत्यायुक्त। मैं, संकल्प या आदेश से किसी विशिष्ट प्रयोजन के लिए सरकार द्वारा गठित समितियों, आयोगों या परिषदों अथवा ऐसे अन्य निकायों की सदस्यता के बारे में संदेहास्पद महसूस करता हूँ।
जैसाकि मैं बता चुका हूँ, मेरा मत है कि कुछ मामलों में, संसद के सदस्य प्रभावित नहीं होंगे। कुछ मामलों में हो सकते हैं। जैसा कि मेरे मित्र प्रो. रंगा ने कहा थाµऔर मैं उनके साथ पूरी तरह से सहमत हूँµलाभ का पद धारित करने के कारण निरर्हती का यह प्रश्न बहुत महत्त्वपूर्ण मामलों में से एक है। भ्रष्टाचार के लिए यह एक आश्चर्यजनक प्रभाव रहा है और हो सकता है और इसीलिए इस मामले में हमें बहुत सावधानी से आगे बढ़ना होगा। मैं नहीं जानता कि इंग्लैण्ड में वे क्या करते हैं। जब भी वे कोई ऐसी विधि बनाते हैं जिसके अंतर्गत वे किसी विशिष्ट पद का सृजन करते हैं तो उसी अधिनियम में वे उपबंध कर देते हैं कि उस पद का धारक ससंद सदस्य बने रहने के लिए निरर्हित