72 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कुछ माननीय सदस्यः सदन के उठने का समय हो गया है।
माननीय उपाध्यक्षः क्या माननीय सदस्य उन्हें कुछ और समय दे रहे हैं?
श्री कामथः ऐसे विधिक मुद्दों के कारण जिनमें मेरे माननीय मित्र डॉ. अम्बेडकर की दिलचस्पी है.........।
डॉ. अम्बेडकरः मैं मात्र विधेयक को पारित कराने का इच्छुक हूँ।
माननीय उपाध्यक्षः प्रकट है सदन उठना चाहता है। सदन 2.30 बजे तक के लिए स्थगित किया जाता है।
तब सदन दो बजकर तीस मिनट तक मध्याहन भोजन के लिए स्थगित हो गया।
सदन दो बजकर तीस मिनट पर पुनः समवेत हुआ।
(उपाध्यक्ष महोदय पीठासीन)
श्री कामथः श्रीमन्, विधि मंत्री यहाँ नहीं हैं।
श्री धिवाः संसदीय कार्य राज्यमंत्री यहां मौजूद है।
माननीय उपाध्यक्षः हाँ।
श्री कामथः अरे, विधि मंत्री आ गए हैं।
मैं प्रसन्न हूँ कि मेरे माननीय मित्र बिल्कुल समय से पहुँच गए हैं। मुझे इस बात की भी प्रसन्नता है कि पूर्वाहन में उन्होंने यह स्वीकार किया था, बेशक अप्रसांगिक रूप से ही, कि इस मामले के संबंध में एक संविधानिक, यद्यपि तकनीकी, गलती हो गई है।
डॉ. अम्बेडकरः मैंने ऐसी कोई भी बात स्वीकार नहीं की है।
श्री कामथः उन्होंने पटना उच्च न्यायालय के विनिर्णय का हवाला देते हुए कहा था कि मैं और श्री त्यागी इस विनिर्णय पर अपनपा मत रख रहे हैं और मामले के इस पहलू पर हमें अधिक गहराई में जाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि वे विधिक मुद्दों या विधिक बिंदुओं मे कोई दिलचस्पी नहीं रखतेµवे केवल यह चाहते हैं कि विधेयक शीघ्र पारित हो जाए। मुझे उनके द्वारा प्रयुक्त शब्द याद नहीं हैं। क्या मैं, श्रीमन्, आप से और सदन से यह जान सकता हूँ कि यदि विधि मंत्री को विधिक मुद्दों में दिलचस्पी नहीं है तो इन विधिक मुद्दों में और किसकी दिलचस्पी होगी?
माननीय उपाध्यक्षः इस बात को छोड़ दीजिए।
श्री कामथः श्रीमन्, यह इस सदन के सदस्यों के अधिकारों के विषय में है। विधि मंत्री यहाँ मौजूद हैं और वे कहते हैं कि उन्हें विधिक मामलों में कोई रुचि नहीं है।