11. संसद (निरर्हता निवारण) विधेयक - Page 90

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पर निरर्हताएँ निर्धारित की गई हैं। मैं केवल आस्ट्रेलिया के संविधान का ही निर्देश करने का समय निकाल सका और उसमें निश्चित रूप से ऐसी धारा है जिसमें उपबंध किया गया है कि सम्राट के अधीन लाभ का पद धारण करने वाला कोई व्यक्ति संसद सदस्य बनने के लिए अर्हित नहीं होगा।

पंडित कुंज़रुः यह सही है।

डॉ. अम्बेडकरः मैं नहीं जानता कि उन्हें आस्ट्रेलिया की संसद द्वारा किसी ऐसी कठिनाई को दूर करने के लिए बनाई गई किसी विधि की परीक्षा करने का समय मिला था जो निस्संदेह परीक्षा से आस्ट्रेलिया के संविधान में उस विशिष्ट धारा के कारण उत्पन्न होनी चाहिए। मुझे उसकी परीक्षा का समय नहीं मिल सका किंतु मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि यदि आस्ट्रेलिया की संसद अपने सदस्यों को लाभ का पद धारित करने के साथ संसद में बैठने और उसका सदस्य बने रहने के लिए अनुज्ञात करती है तो वह किसी के विधान के बिना ऐसा कैसे कर सकती है। जैसा कि मैंने कहा था, मैं इसका अध्ययन करने के लिए समय नहीं निकाल सका, किंतु प्रथम दृष्ट्या मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि यह सबसे अधिक असंभव प्रतिपादना होगी कि आस्ट्रेलिया की संसद अपने सदस्यों को, बिना किसी विधि के, जैसी यहां प्रस्तावित की गई है, संसद में बैठने, मत देने और कार्यवाहियों में भाग लेने के साथ-साथ लाभ का पद धारित करने के लिए अनुज्ञात करें, किन्तु मैं इस संबंध में कुछ नहीं कह सकता।

अब, मैं दूसरे बिन्दु पर आता हूँ और वह यह है। मेरे मित्र श्री कामथ ने विभिन्न बिन्दुओं में से, जिनको रखने की वे ईप्सा कर रहे थे, जिन्हें दुर्भाग्यवश मैं अपनी सीमित बुद्धिमत्ता के कारण नहीं समझ सका था, एक बिन्दु ऐसा था, जिनके बारे में मेरा विचार है कि मैंने उसे समझा था और जिसे स्पष्ट किया जाना अपेक्षित है। उन्होंने कहा है कि विधेयक के प्रारूप के अंतर्गत किसी राज्य की सरकार का सदस्य भी आता है और उनका तर्क यह था कि प्रारूप बेढंगा है। मेरा विचार है कि यदि उन्होंने खंड को ध्यान से पढ़ा होता और अनुच्छेद 102 के खंड (1) के प्रति भी निर्देश किया होता तो उन्हें यह पता चलता कि भाषा केवल आवश्यक ही नहीं बल्कि पूर्णतया न्यायोचित है। मेरे मित्र यह समझ जाएंगे कि विधेयक का खंड (2) दो मामलों से संबंधित हैंµएक सदस्य के रूप में चुने जाने के लिए और दूसरा सदस्य होने के लिए, अर्थात् सदस्य बने रहने के लिए। अब यह प्रस्ताव किया जाता है कि न केवल भारत सरकार के अधीन लाभ का पद धारित करने वाला कोई व्यक्ति ही संसद सदस्य के रूप में खड़ा होने के लिए निरर्हित नहीं होगा, बल्कि इसी प्रकार से राज्य मंत्री या उप मंत्री या संसदीय सचिव या संसदीय अवर सचिव जो किसी राज्य में उस पद को धारित कर रहा हो, वह भी, यदि वह संसद की सदस्यता के लिए साधारण निर्वाचन में खड़ा होना चाहे तो केवल इस तथ्य के कारण निरर्हित नहीं होगा कि वह राज्य में वह पद धारण किए हुए है। यही