76 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कारण है कि किसी राज्य में लाभ का पद धारण करना भी इसके अंतर्गत लाया जाना चाहिए क्योंकि विधेयक का उद्देश्य लोगों के दोनों वर्गों को इस प्रतिरोध से स्वतंत्र करना हैµराज्य मंत्री या उप मंत्री या संसदीय सचिव या संसदीय अवर सचिव चाहे वे केन्द्र में हों या वे राज्य में हों। यही कारण है कि फ्भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीनय् शब्दों का प्रयोग किया गया है।
श्री कामथः मेरे द्वारा उठाए गए बिन्दु का क्या हुआ?
डॉ. अम्बेडकरः मैं उसी पर आ रहा हूँ।
यह प्रश्न उत्पन्न हो सकता है कि यदि आप किसी राज्य में खंड 2 में उल्लिखित किसी पद के धारक को संसद के निर्वाचन हेतु खड़ा होने के लिए अनुज्ञात करते हैं तो निर्वाचित होने के पश्चात् वह संसद सदस्य के रूप में बने रहने के लिए भी हकदार होगा क्योंकि शब्द फ्चुने जाने के लिए, और बने रहने के लिएय् हैं। मेरे मित्र यह देखेंगे कि अनुच्छेद 101 में अंतर्विष्ट संविधानिक उपबंध द्वारा वह कठिनाई स्वतः पूर्णतया समाप्त हो जाएगी क्योंकि जैसे ही किसी राज्य का कोई राज्य मंत्री या उप मंत्री या संसदीय सचिव या संसदीय अवर सचिव संसद के लिए निर्वाचित होता है, उसे यह चयन करना होगा कि वह संसद सदस्य बना रहना चाहता है या राज्य विधानमंडल का सदस्य बना रहना चाहता है। परिणामस्वरूप, यद्यपि इस उपबंध के शब्द इस प्रकार से दिए गए हैं, फिर भी निश्चित रूप से इस प्रकार की कोई कठिनाई नहीं आएगी जो संभवतः उनके मन में है।
श्री कामथः संविधान के अधीन, क्या राज्यों अथवा केन्द्र के लिए भी यह संभव होगा कि उनके ऐसे राज्य मंत्री या उप मंत्री हों जो संबंधित विधानमंडल के सदस्य न हों? कोई भी मंत्री विधानमंडल का सदस्य बने बिना, मंत्री रह सकता है किन्तु जहाँ तक मैं संविधान का निर्वचन कर सकता हूँ, कोई राज्य मंत्री या उपमंत्री उस समय विधानमंडल का सदस्य हुए बिना उस पद को धारण नहीं कर सकता।
डॉ. अम्बेडकरः वह छह माह तक धारण कर सकता है। जहाँ तक उस प्रारूपण पहलू का संबंध है, मैं समझता हूँ कि मैंने इस विषय को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।
मेरे मित्र श्री कृष्णमाचारी उस बिंदु पर मुझे लिखते रहे हैं जिसे मैंने कहा था कि मैंने पिछली रात इस विषय का अध्ययन करने में पर्याप्त समय लगाया था। मुझे विश्वास है कि यदि वह पत्र, अर्थात् संसदीय पत्र, जिसका निर्देश उन्होंने अभी किया है, मुझे उपलब्ध करा दिया गया होता तो मेरी मेहनत काफी कम हो जाती। जैसाकि मैंने कहा, जब मैं गया, तब पुस्तकालय बंद था। मैं सोचता हूँ कि या तो पुस्तकालय बंद था या मेरे मित्र पत्र लेकर चले गए थे और मुझे पत्र पढ़ने का अवसर नहीं दिया।
जहाँ तक मेरे मित्र श्री कामथ द्वारा की गई इस टिप्पणी का संबंध है कि मैं उस