11. संसद (निरर्हता निवारण) विधेयक - Page 92

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समय चूक गया था जब मैंने कहा था कि विधेयक का कुछ भाग, अर्थात् संसदीय सचिव आदि से संबंधित, नई बात है और यह मूल अध्यादेश में सम्मिलित नहीं थी, मैं नहीं समझता कि उनके पास शिकायत करने का कोई आधार है या मुझे क्षमा माँगने की कोई आवश्यकता है। मैं पूर्णतया सहमत हूँ कि यदि कोई सदस्य चूक जाता है, गलत तथ्य बताता है और इन तथ्यों के परिणामस्वरूप या तो सदन का गलत निर्देश होता है या गलत मार्गदर्शन होता है, तो निस्संदेह ऐसा करने का आधार होगा, किंतु यह मात्र एक चूक थी। हर व्यक्ति यह जानता है और मैं नहीं समझता हूँ कि इसीलिए वहाँ कोई ऐसी बात थी जिसपर शिकायतभरी टिप्पणी अपेक्षित थी, मैं यह कह सकता हूँ कि मेरी स्मरण शक्ति मेरे मित्र श्री कामथ की तुलना में कम परिपक्व है। मैं नहीं समझता कि इसमें कोई ऐसा बिन्दु है जो मेरे उत्तर के बिना रह गया हो।

पंडित कुंज़रुः क्या माननीय मंत्री हमें बताएँगे कि क्या राज्य मंत्री, मंत्री परिषद में सम्मिलित हैं या नहीं और क्या उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है?

डॉ. अम्बेडकरः मेरे माननीय मित्र ने यह प्रश्न पहले भी पूछा था। मेरे विचार में वे अच्छी तरह से जानते हैं कि मंत्रिमंडल के भीतर की स्थिति कभी भी विधि द्वारा विनियमित नहीं होती। यह सदैव परंपरा द्वारा विनियमित होती है। यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है कि मंत्री मंडल का सदस्य बनाने के लिए वह किसी भी व्यक्ति को चुनें, यद्यपि उसे विशिष्ट रूप से मंत्री के रूप में पदाभिहित न किया जाए। वह यह कहने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र है, फ्अपने मंत्रिमंडल में, मैं केवल कुछ मंत्रियों को सम्मिलित करूँगा। मैं अन्य मंत्रियों को सम्मिलित नहीं करूँगा किंतु मैं राज्य सचिव या राज्य मंत्री को भी सम्मिलित करूंगा।य् जैसा कि माननीय सदस्य को ज्ञात है, मंत्रिमंडल की आंतरिक व्यवस्था सदैव परंपरा का विषय रही है। यदि वे चाहते हैं तो मैं इस समय विद्यमान स्थिति बता सकता हूँ किन्तु उन्हें यह समझना चाहिए कि वह केवल वर्तमान के लिए होगी। वर्तमान प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल की कार्य विधि को बदल सकता है, अथवा यदि कोई उत्तराधिकारी आता है तो वह भी भिन्न व्यवस्था अपना सकता है। इसीलिए इसका कोई लाभ.....

पंडित कुंज़रुः क्या मैं अपने माननीय मित्र को बीच में टोक सकता हूँ, क्या वे मंत्रि-परिषद् पद को मंत्रिमंडल का समानार्थक समझते हैं?

डॉ. अम्बेडकरः मैं ऐसा नहीं समझता। जैसा कि आज प्रातः मैंने अपने आरम्भिक भाषण में कहा था, यह ऐसा वाक्यांश है जिसके दो निर्वचन हो सकते हैं। मैंने संविधान विधि पर लेखकों की मताभिव्यक्तियों का अध्ययन किया है, जहाँ उन्होंने कहा है कि मंत्री पद में संसदीय सचिव और संसदीय अवर सचिव भी सम्मिलित हैं। ऐसे अन्य लेखक भी हैं जो यह कहते हैं कि ‘मंत्री’ एक संकीर्ण पद है। इसीलिए, जैसा कि मैंने कहा, किसी व्यक्ति को संतुष्ट करना या सही उत्तर देना बहुत कठिन है। यह एक अनिश्चित