78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
स्थिति है और इसे अनिश्चित ही रहने देना चाहिएः यही महत्वपूर्ण भाग है। मेरे ऊपर इस बात के लिए दबाव डालने का कोई लाभ नहीं है कि मैं अपने माननीय मित्र को यह स्थिति स्पष्ट करूँ कि मंत्रियों और संसदीय सचिवों की एक ही स्थिति कैसे?
पंडित कुंज़रुः मुझे खेद है कि मैं अपना पक्ष समझाने में विफल रहा। मैं अपने माननीय मित्र की आलोचना नहीं कर रहा हूँ। मैं मात्र इतना जानना चाहता हूँ कि यदि मंत्रि-परिषद का अर्थ वह नहीं है जो मंत्रिमंडल का है जो निश्चित रूप से यह मंत्रिमंडल से अधिक बड़ा निकाय होगा......
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जी हाँ।
पंडित कुंज़रुः .........और राज्य मंत्री तथा उपमंत्री इसमें शामिल हो सकते हैं। इसलिए उनकी स्थिति के संबंध में कोई प्रश्न उत्पन्न नहीं होता।
डॉ. अम्बेडकरः मैं इसके विस्तार में जाना आवश्यक नहीं समझता। माननीय प्रधानमंत्री ने एक आधिकारिक वक्तव्य में कहा था कि उनकी राय में मंत्रि-परिषद में हर कोई सम्मिलित हैं।
श्री टी. हुसैन (बिहार)ः मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ। संविधान में यह स्पष्ट है कि कोई मंत्री संसद सदस्य हुए बिना छह मास तक मंत्री रह सकता है। इसका उल्लेख स्वयं संविधान में किया गया है। इस तरह का कोई उल्लेख राज्य मंत्री या उप मंत्री या संसदीय सचिव या संसदीय अवर सचिव के बारे में नहीं है। माननीय विधि मंत्री ने हमें अभी बताया है कि विधेयक के उनके पठन के अनुसार कोई राज्य मंत्री, संसदीय सचिव या संसदीय अवर सचिव, संसद सदस्य हुए बिना छह मास तक पद धारण कर सकता है। मैंने विधेयक पुनः पढ़ा है और मैं यह नहीं समझ सका कि माननीय मंत्री ने यह निष्कर्ष कैसे निकाला। क्या वे स्पष्ट करेंगे?
माननीय उपाध्यक्षः यह पूर्णतया इस विधेयक से सुसंगत नहीं है। सदस्य इस विषय का अध्ययन फुरसत में कर सकते हैं।
डॉ. देशमुखः श्रीमन्, एक बिन्दु, जो तथ्य का विषय है, स्पष्ट किया जाए अर्थात् क्या उप मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। यह मामला पूर्णतया तथ्य का है और संभवतः माननीय मंत्री, इसका उत्तर देने में समर्थ होंगे।
माननीय उपाध्यक्षः इस संबंध में यह कैसे आवश्यक है?
डॉ अम्बेडकरः निश्चित रूप से, वे राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाते हैंः और कौन नियुक्त कर सकता है?
माननीय उपाध्यक्षः प्रश्न यह हैः