12. स्थगन के लिए प्रस्ताव - Page 95

80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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स्थगन के लिए प्रस्ताव

ऽश्रीगोपालस्वामीः क्या मैं यह बता सकता हूँ कि श्री चैम्बरलेन वाद-विवाद विमर्श के स्थगन के प्रस्ताव के प्रश्न से सम्बद्ध नहीं थे?

पंडित कुंज़रुः ठीक है। मेरा विचार है कि श्री चैम्बरलेन के उत्तर के आधार पर सर एन.एन. सरकार द्वारा दिए गए उत्तर पर निर्भर रहते हुए डॉ. अम्बेडकर इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि इस प्रकार के मामले में जानकारी के लिए मांग और चर्चा के लिए मांग के बीच कोई अन्तर नहीं है। सन एन.एन. सरकार ने अपने उत्तर में फ्चर्चाय् शब्द का प्रयोग किया था और यहीं वह शब्द है जिस पर मेरे मित्र डॉ. अम्बेडकर ने भरोसा किया।

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) ः मैं, श्री चैम्बरलेन द्वारा दिए गए उत्तर पर मेरे माननीय मित्र द्वारा की गई टिप्पणी और उनके द्वारा प्रश्न पूछे जाने के समय विद्यमान स्थिति और उस स्थिति के बीच, जो हमारे संविधान के अनुच्छेद 371 के अधीन उत्पन्न होगी, अनुरूपता स्थापित करने के प्रयास के संबंध में केवल एक ही शब्द कहना चाहूँगा। मैं उनसे अनुरोध करना चाहूँगा कि वे हमारे अब के संविधान और भारत शासन अधिनियम, 1935 के बीच विद्यमान मूलभूत अन्तर को ध्यान में रखें। वह अन्तर यह है कि जब संसद ने 1935 का अधिनियम बनाया था और कुछ जिम्मेदारियां भारत के लोगों को अंतरित की थीं वे बार-बार इस बात पर जोर देने में कभी नहीं चूके कि भारत में सुशासन की अन्ततः जिम्मेदारी संसद में निहित रहेगी, और इसीलिए निदेश देने के लिए आरक्षित शक्ति की सीमा तक वह वास्तव में सुशासन चलाने के लिए जिम्मेदार है_ जबकि हमारे संविधान के अधीन हमने सुशासन चलाने की शक्ति अपने राज्यों को दी है और केवल कुछ मामलों में हमने निदेश देने की कतिपय शक्तियाँ केन्द्र के लिए आरक्षित रखी हैं। इस अन्तर को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

पंडित कुंज़रुः मैं अपने माननीय मित्र डॉ. अम्बेडकर से पूरी तरह असहमत हूँ, उनके द्वारा उठाए गए साधारण बिन्दु के संबंध में नहीं, बल्कि उनके द्वारा अनुच्छेद 371 पर किए गए अर्थान्वयन के संबंध में। जैसाकि मेरे माननीय मित्र ने एक दिन बताया था, यह अनुच्छेद 371 वर्ग ‘क’ के राज्यों पर लागू नहीं होता_ यह केवल वर्ग ‘ख’ के राज्यों पर लागू होता है, और क्यों? यह अनुच्छेद 371 केवल वर्ग ‘ख’ के राज्यों के निर्देश में संविधान में क्यों अंतः स्थापित किया गया था? यह वहाँ सुशासन सुनिश्चित कने के लिए अंतः स्थापित किया गया था।

ऽसं. वा., खंड 2, भाग II, 14 मार्च, 1950, पृष्ठ 1512-13