13. सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक - Page 96

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सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक

ऽश्री सिधवा (मध्य प्रदेश)ः यह एक ऐसा विधेयक है जो मैंने गत सत्र में पेश किया था। माननीय विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) ने मुझे बताया था कि वे राज्यों की राय लेना चाहेंगे। अतः औपचारिक रूप से विधेयक पेश करने से पूर्व मैं यह जानना चाहूँगा कि क्या प्रांतों की राय प्राप्त हो गई है? यदि नहीं, तो मैं यह चाहूँगा कि यह विधेयक केंद्र प्रशासित क्षेत्रों तक सीमित रहे।

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः श्रीमन्, उस वचन के अनुसार जो मैंने अपने मित्र श्री सिधवा को उनके द्वारा विधेयक पेश करते समय दिया था और उस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए कि यह मामला समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है और भारत सरकार के स्थायी आदेशों के अनुसार यह आवश्यक है कि कोई विधान बनाने से पूर्व राज्यों से परामर्श कर लिए जाए, मेरे मंत्रालय ने मेरे मित्र श्री सिधवा द्वारा तथा यथा प्रस्तावित विधि के प्रस्तावित अधिनियमन के संबंध में प्रांतों के विचार प्राप्त करने के लिए उन्हें एक पत्र भेजा था। मुझे यह कहते हुए खेद को रहा है कि विभिन्न राज्यों की पूर्व व्यस्तता के कारण उन सबके उत्तर अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं। तथापि, मुझे भाग ‘क’ के दो राज्यों और भाग ‘ग’ के कुछ राज्यों से उत्तर प्राप्त हुए हैं।

भाग ‘क’ के राज्यों के संबंध में, मुझे केवल मद्रास और पंजाब से उत्तर प्राप्त हुए हैं और मुझे यह कहते हुए खेद हो रहा है कि उन दोनों ने केन्द्र द्वारा ऐसा विधान बनाए जाने का विरोध किया है। मद्रास सरकार ने कहा है कि वे स्वयं इस विशिष्ट विधेयक में उठाए गए बिन्दुओं से संबंधित एक संपूर्ण और व्यापक विधान बनाने पर विचार कर रहे हैं। पंजाब सरकार ने कहा है कि वे वैसा ही शास्ति खंड रखने की आवश्यकता को समझते हैं जैसा कि श्री सिधवा द्वारा प्रस्तावित किया गया है, किंतु वे कहते हैं कि उन्होंने स्वयं हाल ही में ऐसी शास्ति अधिरोपित करने वाली विधि अधिनियमित की है और जहाँ तक उस विशिष्ट प्रांत का संबंध है, ऐसा कोई विधान आवश्यक नहीं है।

भाग ‘ग’ के राज्यों के संबंध में, उनके द्वारा अपनाई गई स्थिति इस प्रकार हैः कि इस समय उनके सामने ऐसी कोई समस्या नहीं हैं। उन में से कुछ कहते हैं कि उनकी अधिकारिता के भीतर ऐसी सोसाइटियाँ विद्यमान नहीं है। कुछ अन्यों ने कहा है कि वह विधि, जिसका संशोधन करने की ईप्सा मेरे मित्र श्री सिधवा कर रहे हैं, हाल ही में वर्ष 1949 में उनके क्षेत्र में प्रारम्भ कर दी गई है। वहाँ कोई सोसाइटी नहीं है और वह सुझाव देने के लिए अभी कोई अनुभव नहीं हुआ है कि क्या किसी सोसाइटी द्वारा

ऽसं. वा., खंड 3, भाग II, 25 मार्च, 1950, पृष्ठ 2115-16