82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विधेयक के किसी उपबंध का अतिक्रमण किया गया है। यह स्थिति उन विभिन्न राज्यों के उत्तरों से स्पष्ट हुई है जिन्हें यह पत्र भेजा गया था। कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण राज्यों जैसे बंबई, यू.पी. और मध्य प्रदेश ने कोई उत्तर नहीं दिया है। यह विषय समवर्ती सूची में रखा गया है, और यह वांछनीय है कि केन्द्र द्वारा ऐसा विधान बनाए जाने से पहले हमें भाग ‘क’ में से अधिकांश या अधिकतर राज्यों की प्रतिक्रिया मिल जानी चाहिए।
जैसाकि मैंने पिछली बार कहा था, व्यक्तिगत रूप से मेरा विचार नहीं है कि मेरे मित्र श्री सिधवा द्वारा ली गई इस स्थिति से कोई भी वास्तविक रूप से विवाद कर सके कि यदि इस विधेयक के उपबंधों को प्रभावी बनाना है तो इस प्रकार को कोई शास्ति खण्ड रखा जाना आवश्यक है। मैं उनसे सहमत हूँ। किन्तु मेरा बिन्दु यह है कि इस विधान को बनाने के लिए अधिकतर राज्यों को साथ मिलाना वांछनीय है और चूंकि उन्होंने अभी तक उत्तर नहीं दिए हैं, इसलिए व्यक्तिगत रूप से मेरी प्राथमिकता यह होगी कि या तो इस विधेयक को वापस ले लिया जाए या इसे इस आश्वासन के साथ रोक रखा जाए कि जैसे ही समय और परिस्थितियाँ अनुमति देंगी, केन्द्र स्थिति का लाभ उठाएगा।
श्री सिधवाः श्रीमन्, मेरे मित्र डॉ अम्बेडकर के इस कथन को ध्यान में रखते हुए कि वे व्यक्तिगत रूप से इस विधेयक के पक्ष में हैं और चूंकि यह विषय समवर्ती सूची में है, इसलिए वे चाहेंगे कि सभी महत्त्वपूर्ण राज्यों की राय ली जाए, मैं इस विधेयक को रोक कर रखना चाहूँगा। मैं किसी भी स्थिति में विधेयक वापस नहीं ले सकता, यह एक महत्त्वपूर्ण विधेयक है। मैं जानता हूँ कि विभिन्न सोसाइटियों में क्या हो रहा है। इसीलिए मैं आप से अनुरोध करूँगा कि मुझे यह विधेयक जीवित रखने दें। मैं अभी इसे पेश नहीं करूँगा।
माननीय अध्यक्षः यदि इस समय कोई प्रस्ताव नहीं किया जाता है तो यह स्वतः नियमों के अधीन जीवित रहेगा।