84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकरः मैं भाग ‘ख’ राज्यों पर अलग से बात करूँगा। जहाँ तक वर्तमान में, भाग ‘ख’ राज्यों में निर्दिष्ट से भिन्न यूनिटों पर इस अधिनियम के उपबंधों को लागू करने के लिए धारा 4 के उद्देश्य का संबंध है, मुझे नहीं लगता कि उस विशिष्ट धारा में अंतर्विष्ट उपबंधों के प्रति कोई विधिमान्य आक्षेप हो सकता है।
धारा-5 के संबंध में, जो भाग ‘ख’ राज्यों के विषय में है, मेरे माननीय मित्र की दलील है कि यह अनुपयुक्त है और धारा 4 का पिछला भाग भी जिसमें भाग ‘ख’ राज्यों का उल्लेख है। इस प्रश्न का उत्तर यह है। मेरे माननीय मित्र को याद होगा कि संविधान सभा के प्रारंभिक भाग में स्थिति यह थी कि भाग ‘ख’ राज्यों को, जिन्हें उस समय सम्मिलित होने वाले राज्य कहा जाता था, स्वयं अपने बल स्वतंत्र रूप से तैयार करने और उनको बनाए रखने की शक्तियाँ दी गई थीं। यदि उनके पास संविधान के मूल प्रारूप की प्रति हो तो उन्हें पृष्ठ 189 पर मद 4 दिखाई देगी और उन्हें यह भी पता चलेगा कि मैंने इस उपबंध पर आपत्ति की थी। मैं नहीं चाहता था कि संघ के अधीन किसी विशिष्ट यूनिट को फौज तैयार करने और उसे बनाए रखने का अधिकार दिया जाए। मैं प्रसन्न था कि उस समय मेरी दलील स्वीकार की गई थी और प्रविष्टि के उस भाग का लोप कर दिया गया था, जिससे कि संविधान के अधीन फौज तैयार करने और उसे बनाए रखने का अधिकार अनन्य रूप से संघ के पास रहे। यद्यपि इस स्थिति को स्वीकार कर लिया गया था किन्तु इससे कठिनाई पूर्णतया समाप्त नहीं हुई थी।
जैसा कि मेरे माननीय मित्र भली प्रकार से परिचित हैं, भारत सरकार ने भाग ‘ख’ में उल्लिखित विभिन्न भारतीय राज्यों के साथ कतिपय प्रसंविदाएं की थीं। प्रसंविदा की शर्तों में से एक शर्त यह भी कि ऐसे राज्य, जिन्होंने अपने कुछ बल तैयार किए हैं और उन्हें बनाए रखा है, उन्हें बनाए रखेंगे और जिस बात से उन्हें वर्जित किया जाना था वह थी नई फौज तैयार करना। विद्यमान यूनिटें चलती रहेंगी। फिर प्रश्न यह उत्पन्न हुआ कि विद्यमान यूनिटों का क्या होगाः क्या वे स्वतंत्र होंगी या वे भारत सरकार के सेना प्राधिकारियों के अधीनस्थ होंगी? एक समझौता किया गया था जिसका उल्लेख उनके द्वारा निर्दिष्ट अनुच्छेद 259 में किया गया है। उसमें यह उपबंध किया गया है कि यद्यपि पहले से तैयार फौज को जारी रखा जाएगा किन्तु वे ऐसी विधि के अधीन होंगे जो संसद बनाए। अब, संसद के लिए यह घोषणा करते हुए विधि बनाना संभव है कि भाग ‘ख’ राज्यों में पहले से तैयार फौज सभी प्रयोजनों के लिए भारत की नियमित सेना का अंग समझी जाएगी। वास्तव में, आशय यही है। किन्तु जैसा कि मैंने कहा, ये मामले प्रसंविदा द्वारा शासित हैं। यद्यपि, राज प्रमुख, जो भाग ‘ख’ के राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं, अनुच्छेद 259 में अंतर्विष्ट उपबंधों को स्वीकार करने अर्थात् ऐसी विधि बनाने की शक्ति संसद को प्रदत्त करने के लिए तैयार थे फिर भी उनकी इच्छा थी कि वे उन बलों के